
भोपाल। प्रदेश में लीज नवीनीकरण की दर अब 50 फीसदी से घटाकर औसतन 10 फीसदी की जा सकती है। इसके अलावा लीज रेट को आबादी और प्लाट साइज से जोड़कर फिक्स किया जाएगा। अभी तक यह कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से होता था। यह प्रावधान नई लीज नवीनीकरण नीति में किए जा रहे हैं।
नीति का प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। प्रदेश में वर्ष-2000 के आदेश के तहत शुल्क आधारित लीज का नवीनीकरण होता था, लेकिन वर्ष-2014 में जब नए आदेश आए तो लीज रेट 50 फीसदी कर दिया गया। इसके बाद लीज लेने वालों ने नजूल पट्टों का नवीनीकरण कराना बंद कर दिया, क्योंकि 50 फीसदी के हिसाब से रेट बहुत ज्यादा लगा।
इस कारण सरकार अब इसे घटाकर दस फीसदी करने जा रही है। पिछले तीन साल से लीज नवीनीकरण की नीति की कवायद चल रही थी। इसे अब इसे अंतिम रूप देकर कैबिनेट को पेश किया जाएगा। फिलहाल इसका प्रस्ताव वित्त विभाग को मंजूरी के लिए भेजा गया है।
आबादी व प्लाट साइज का आधार-
नई नीति के तहत आबादी का मानक रखा जाएगा। इसमें 50 हजार, दो लाख और दो लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के हिसाब से नवीनीकरण फार्मूला लागू किया जाएगा। इसके अलावा प्लाट साइज में 1500 वर्गफीट, 1500 से 10 हजार वर्गफीट और 10 हजार से ज्यादा वर्गफीट की तीन श्रेणियां रखी जाएगी। इन तीनों श्रेणियों के हिसाब से लीज रेट तय कर दिया जाएगा। अभी तक यह कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से पचास फीसदी तक रहता है।
4500 करोड़ का राजस्व मिलेगा-
सरकार को लीज नवीनीकरण नीति के आने के बाद 4500 करोड़ का राजस्व मिलेगा। वर्ष-2014 से लीजधारकों ने नवीनीकरण नहीं कराया है। नई नीति आने पर उसके आधार पर नवीनीकरण अनिवार्य होगा। इसमें 22 प्रकार की श्रेणियां तैयार की गई है। इसके तहत अवैध तरीके से रहने वाले, नवीनीकरण नहीं कराने वाले और अन्य श्रेणियों में एक हजार, दो हजार और पांच हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
Published on:
11 Apr 2018 09:18 am
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