
भोपाल। हैंडओवर से पहले इस भवन की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग के चार अफसरों की टीम बनाई है, ये टीम जल्द ही दिल्ली जाकर नए भवन की गुणवत्ता की जांच करेगी। आवासीय आयुक्त पंकज राग ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर निरीक्षण की बात कही है। जिसके बाद विभाग ने लोक निर्माण विभाग के सचिव और गुणवत्ता नियंत्रण सेल के अध्यक्ष आरके मेहरा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। कमेटी में पीआईयू के मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी, अधीक्षण यंत्री राजेश दुबे और सहायक यंत्री ब्रजेश मांझी को शामिल किया है।
गुणवत्ता पर उठाए ये सवाल
राग ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखा निर्माण परियोजना में एनबीसीसी को निर्माण एजेंसी रखा गहया था। परियोजना में एनबीसीसी को भवन निर्माण का सुपर विजन और पीएमसी कार्य के लिए 7 प्रतिशत चार्ज दिया जाना है। एजेंसी ने कार्यों की अपनेस्तर पर सुपर विजन कर निर्माण निर्धारित विशिष्ठता के अनुसार पाए जाने और समस्त फिटिंग एवं उपकरण निर्धारित ब्रांड और गुणवत्ता के अनुसार होने का सत्यापन किया था।
फिर से जांच की तो गड़बड़ी का हुआ खुलासा
मप्र भवन के अधिकारियों ने इमारत को अपने नियंत्रण में लेने से पहले जब निरीक्षण किया गया तो प्रत्येक कमरे व अधिकांश उपकरणों तथा फिटिंग में निर्धारित विशिष्ठता के अनुसार कार्य न होना पाया गया। कुछ फिटिंग तो अनुबंध के अनुसार तय ब्रांड तक के नहीं थी। गुणवत्ता के न होने के साथ लुज इलेक्ट्रीकल वायरिंग थी तो कहीं जगह एसी डक्ट और गर्म पानी के पाइप बिना इस्टालेशन के ही छोड़ दिए गए। बेसमेंट के बाथरूम, पानी के संपवेल में सिपेज पाया गया।
कहीं लोहे तो कहीं प्लास्टिक के पाइप डाले
वहीं, कुछ जगह रनिंग पाइप के मटेरियल में भी परिवर्तन पाया गया। यानी निर्माण के दौरान कुछ जगह लोहे के पाइप लगाए गए तो बीच-बीच में कहीं पीवीसी तो कहीं प्लास्टिक के पाइप लगाकर जोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, आईबीएमएस सिस्टम में सभी कमरों में एसी, टेलिफोन, फायर फिटिंग, सीसीटीवी और इलेक्ट्रीक पैनल आदि की फीड ही उपलब्ध नहीं कराई गई। जह अधिकारियों ने इसके बारे में पूछताछ की तो उन्हें कह दिया गया कि आईबीएमएस में इसका प्रावधान ही नहीं किया गया। जब तकनीकी सलाहकारों और अन्य अधिकारियों ने गोलमोल जवाब देकर मामले को टालने की कोशिश की।
अब टीम फिर से करेगी जांच
राग ने पत्र में लिखा कि एनबीसीसी ने निर्माण का सुपर विजन न तो निर्माण के समय ठीक ढंग से किया गया है न ही हैंडओवर के पहले।यहां एक ओर मध्यप्रदेश भवन के गैर तकनीकी अधिकारी-कर्मचारी द्वारा इतनी गम्भीर कमियां नवनिर्मित मध्यप्रदेश भवन में पाई है। जबकि एनबीसीसी के तकनीकी और विषय विशेषज्ञ सब कुछ बता रहे हैं। जानबूझकर कमियों को छिपाया जा रहा है। हैंडओवर से पहले किसी स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ एजेंसी से निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त किया जाना अत्यावश्यक हो गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भवन निर्माण निर्धारित गुणवत्ता व मानदण्ड के अनुसार किया गया है।
Published on:
31 Aug 2023 06:40 pm
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