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अब हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को मिलेगी एसयूवी फॉर्च्यूनर

सरकार MP हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए नई एसयूवी खरीदने पर करीब छह करोड़ रुपए खर्च करने को तैयार हो गई है।

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SUV for High Court judges

भोपाल। इसके तहत MP हाईकोर्ट के 40 न्यायाधीशों के लिए अब लग्जरी एसयूवी फॉर्च्यूनर गाड़ी खरीदी जाएगी। वित्त विभाग के पास इस संबंध में एक प्रस्ताव आया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।

न्यायाधीशों के लिए टोयोटा कंपनी की खरीदी जा रही फॉर्च्यूनर लग्जरी सेगमेंट की गाड़ी है। इसकी कीमत 25 लाख रुपए से 31 लाख रुपए तक है। सामने आ रही सूचनाओं के अनुसार न्यायाधीशों के लिए टॉप मॉडल की एसयूवी खरीदी जा रही है। वहीं सूत्रों का कहना है कि सरकारी खरीदी की वजह से ये गाड़ियां कम कीमत पर मिलेगी।

आधिकतर खरीदी जाती हैं सिडान कार:
आमतौर पर न्यायाधीशों के लिए सिडान कार ही खरीदी जाती थीं। सूत्रों के अनुसार यह पहली बार हो रहा है कि न्यायाधीशों के लिए एसयूवी सेगमेंट की गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। इससे पहले कुछ एसयूवी वाहन जरूर अलग से खरीदे गए हैं। कहा जा रहा है कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए नए वाहन खरीदने के लिए अलग से बजट का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए सरकार की अन्य योजनाओं में बचे हुए पैसों से यह वाहन खरीदे जाएंगे। अगले एक से दो महीने में यह वाहन खरीदे जाने हैं।

इधर, अतिथि शिक्षकों पर हाईकोर्ट का आदेश :-
इससे पहले अतिथि शिक्षकों (विद्वानों) की कॉलेज में नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक ज्वाइनिंग का वक्त दिया था। जिसकी समय सीमा समाप्त हो गई है। कोर्ट ने याचिका लगाने वाले और जो कोर्ट नहीं आ पाए उन सभी अभ्यर्थियों को यह आखिरी अवसर दिया है। दी गई इस मोहलत के बाद रिक्त सीटों पर मेरिट के अनुसार वरीयता दी जाएगी।

इस संबंध में वकील वृंदावन तिवारी की ओर से याचिका लगाई गई थी। जिस पर जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला की बेंच ने सुनवाई की। अपने फैसले में उन्होंने उन सभी गेस्ट फेक्ल्टी को राहत दी जो पिछले साल जिस कॉलेज में पढ़ा रहे थे, वहीं पदस्थापना करवाना चाहते थे।

कोर्ट ने आदेश में कहा था कि ऐसे सभी अतिथि व्याख्याता 14 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कॉलेजों में ज्वानिंग दें। आदेश उन्हीं शिक्षकों पर मान्य होगा जिन्होंने अभी तक किसी कॉलेज में ज्वाइनिंग नहीं दी है। इसके अलावा जिन्होंने गत वर्ष ज्वाइनिंग वाले कॉलेज में ही पढ़ाया हो।

इस तय अवधि के बाद रिक्त सीटों पर वरीयता के आधार पर अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति की जाएगी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग भी आदेश की समीक्षा करने में जुट गया। सभी सरकारी कॉलेजों को क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय की तरफ से अतिथि व्याख्याताओं को ज्वाइनिंग देने के निर्देश दिए गए।