
Monsoon 2026 MP-मध्यप्रदेश की सीमा के करीब पहुंच गया है मानसून...। जल्द ही मध्यप्रदेश में इसका प्रवेश होगा। (विजुअल-पत्रिका)
Monsoon 2026 MP- मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हलचल नजर आने लगी है। महाराष्ट्र की सीमा से मानसून मध्यप्रदेश में प्रवेश करेगा। मानसूनी गतिविधियों में इजाफा हुआ है और कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही बढ़ गई है, उमस भी बढ़ गई है। इसके अलावा तेज हवाओं के साथ बारिश भी दर्ज की गई है। इससे मानसून के करीब होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि देरी से आ रहे मानसून की तारीख का अनुमान लगाना मुश्किल है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 22 जून को महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई भागों तक बढ़ गया है। इसकी उत्तरी सीमा मध्यप्रदेश के समीप पहुंच गई है। कुछ ही दिनों में मानसून मध्य प्रदेश में प्रवेश कर जाएगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भोपाल के पूर्व मौसम वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार नायक कहते हैं कि 1 जून से 22 जून तक मध्यप्रदेश में औसतन केवल 34.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 70.9 मिमी होनी चाहिए थी। अर्थात मध्य प्रदेश में इस समय 52 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
सबसे अधिक चिंता पूर्वी मध्यप्रदेश की है, जहां वर्षा की कमी 71 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बालाघाट, दमोह, नरसिंहपुर, मंडला, कटनी, सिवनी, पन्ना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, रीवा और अनूपपुर जैसे जिलों में वर्षा का गंभीर अभाव बना हुआ है।
दूसरी ओर भोपाल, नीमच, श्योपुर, मंदसौर, गुना और अशोकनगर जैसे जिलों ने सामान्य से अधिक वर्षा प्राप्त की है। यह असमानता दर्शाती है कि मानसून की सक्रियता अभी पूरे प्रदेश में समान रूप से स्थापित नहीं हो पाई है।
बीते 24 घंटों में एमपी में सबसे अधिक बारिश रायसेन जिले में दर्ज हुई, यहां 60.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मुंगावली में 40 मिमी, रहली और बड़ामलहरा में 33-33 मिमी तथा धूलकोट में 32.3 मिमी वर्षा हुई।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र नायक कहते हैं कि भोपाल संभाग में भी मानसून की प्रारंभिक सक्रियता दिखाई देने लगी है। कोलार क्षेत्र सहित राजधानी के आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि अधिकांश जिलों में वर्षा अभी भी छिटपुट और स्थानीय स्तर तक सीमित है।
मध्यप्रदेश में मानसून के आने से पहले आर्द्रता तेजी से बढ़ रही है। जबलपुर में 84 प्रतिशत, उज्जैन में 80 प्रतिशत, धार और राजगढ़ में 77 प्रतिशत तथा मंडला में 75 प्रतिशत आर्द्रता दर्ज की गई। बढ़ी हुई नमी के कारण लोगों को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी का अनुभव हो रहा है। यही कारण है कि कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री से नीचे होने के बावजूद मौसम अत्यधिक उमस भरा महसूस हो रहा है।
मानसून के करीब आने के बावजूद कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। दतिया में 40.6 डिग्री सेल्सियस, खजुराहो में 40.4 डिग्री, सीधी में 40 डिग्री, मालांजखंड और नौगांव में 39.8 डिग्री तथा ग्वालियर में 39.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। रात्रिकालीन तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। दतिया, सीधी, उमरिया और ग्वालियर में रातें गर्म बनी हुई हैं, जबकि पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा।
बीते 24 घंटों में कई जिलों में तेज आंधी और गरज-चमक की घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे तेज हवा जबलपुर में 52 किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा सागर में 48, नरसिंहपुर और सतना में 46, गुना में 41 तथा सीहोर में 39 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। मौसम विज्ञान की दृष्टि से ये हवाएं वातावरण में बढ़ती नमी और अस्थिरता का संकेत हैं, जो मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियों को दर्शाती हैं।
फिलहाल एमपी में मानसून नहीं पहुंचा है, लेकिन जानते हैं कि कौन से प्रदेशों तक यह पहुंच गया है। असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, केरल, तटीय कर्नाटक और लक्षद्वीप में अधिकांश स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी तट पर मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसके विपरीत मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कई हिस्सों में बारिश अभी भी सीमित क्षेत्रों में ही है।
इस साल मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे एल नीनो पर भी टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन के दौर में एल नीनो की घटनाएं सूखा, जल संकट और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं को और गंभीर बना सकती हैं। मध्यप्रदेश जैसे मानसून आधारित कृषि राज्यों के लिए यह विशेष चिंता का विषय है। यदि मानसून की गति धीमी रहती है या जुलाई में लंबे शुष्क अंतराल बनते हैं, तो खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शैलेंद्र नायक के अनुसार मौसम की मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि बंगाल की खाड़ी से नमी की आपूर्ति बढ़ रही है और कई अनुकूल मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। यदि मानसून अगले सप्ताह प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ता है तो वर्तमान वर्षा घाटे में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। विशेष रूप से महाकौशल, विंध्य, बुंदेलखंड और निमाड़ क्षेत्रों को व्यापक और अच्छी बारिश की आवश्यकता है। किसानों, जलाशय प्रबंधन एजेंसियों और मौसम वैज्ञानिकों की नजरें अब जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले पखवाड़े पर टिकी हुई हैं।
शैलेंद्र नायक कहते हैं कि मध्यप्रदेश इन दिनों मानसून का इंतजार और मौसम की अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। एक ओर बढ़ती उमस, तेज हवाएं और स्थानीय वर्षा मानसून के आगमन का संकेत दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर 52 प्रतिशत बारिश का घाटा चिंता बढ़ा रहा है। आने वाले दो सप्ताह यह तय करेंगे कि प्रदेश सामान्य मानसून की ओर बढ़ेगा या फिर वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी करेगी।
Published on:
22 Jun 2026 07:23 pm
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