
हस्त शिल्प विकास निगम
भोपाल। मध्यप्रदेश पर लकड़ी उत्पादक राज्य का ठप्पा है। यहां देश की 20 फीसदी से ज्यादा लकड़ी का उत्पादन तो होता है, लेकिन लकड़ी के फर्नीचर बनाने में मध्यप्रदेश फिसड्डी है। मध्यप्रदेश की लकड़ी पर उत्तरप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के फर्नीचर निर्माताओं का कब्जा है। ऐसे में अब मध्यप्रदेश हस्त शिल्प विकास निगम ने अब प्रदेश में फर्नीचर उद्योग में तेजी लाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है। निगम के अधिकारियों का दावा है 6 माह के अंदर ये प्रोजेक्ट जमीन पर उतर जाएगा।
हस्त शिल्प विकास निगम के अफसरों ने पिछले दिनों अनंतनाग का दौरा कर वहां फर्नीचर निर्माण और कारोबार को बारीकि से समझा है। एक टीम सहारपुर भेजी जा रही है। हस्त शिल्प विकास निगम ने मध्यप्रदेश में फर्नीचर के तीन हब बनाने का फैसला लिया है। इसमें से ट्रायबल फर्नीचर हब की स्थापना के लिए केंद्र सरकार के आदिम जाति कल्याण विभाग से आर्थिक मदद ली जाएगी तो वहीं अन्य क्लस्टर में कौशल विकास विभाग की मदद से प्रशिक्षण का काम किया जाएगा।
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ट्रेनिग, निर्माण और मार्केटिँग पर फोकस-
हस्त शिल्प विकास निगम फर्नीचर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तीन अलग-अलग चरणा में काम करने जा रहा है। फर्नीचर निर्माण के लिए जहां युवाओं को नेशनल स्कूल ऑफ डिजाइन जैसे संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा तो वहीं फर्नीचर निर्माण और उद्योग स्थापना में भी मदद की जाएगी। निगम बने हुए फर्नीचर की मार्केटिंग में भी मदद करेगा। हस्त शिल्प विकास निगम के देश भर में स्थित शोरूम में भी यह फर्नीचर बेंचने के लिए रखा जाएगा।
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-ट्रायबल फर्नीचर हब-
बैतूल, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट
इन जिलों में आदिवासी लोककला पर आधारित फर्नीचर बनाने वाले कारीगर तलाशे जा रहे हैं। उन्हें प्रशिक्षण देकर व्यवयायिक स्तर पर ट्रायबल फर्नीचर बनाया जाएगा।
-सहारनपुर पैटर्न फर्नीचर हब-
सागर, छतरपुर, पन्नर
ये जिले उत्तरप्रदेश से जुड़े हुए हैं। यहां से बड़ी मात्रा में फर्नीचर बनाने के लिए लकड़ी सहारनपुर जाती है। हस्तशिल्प विकास निगम इन तीन जिलों में सहारनपुर पैटर्न के फनीर्चर का नया हब तैयार करेगा।
-कॉलोनियल फर्नीचर हब-
भोपाल, रायसेन, सीहोर
ब्रिटिश और यूरोपियन शैली के कॉलोनियल फर्नीचर की बड़ी डिमांड है। तीन जिलों के कारीगरों को इस तरह के फर्नीचर का प्रशिक्षण देकर इसका हब तैयार किया जाएगा। इसमें मार्डन डिजाइन का भी समावेश करने की योजना है।
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यह है जमीनी हालात-
फर्नीचर के लिए सबसे बेहतर लकड़ी सागौन का गढ़ मध्यप्रेदश को माना जाता है। यहां के जंगलों में देश का 40 प्रतिशत सागौन होता है। इसके साथ ही साल, शीशम, खम्हार, बबूल, बांस भी बहुतायत में है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में 174372 घन मीटर इमारती लकड़ी और 28262 यूनिट बांस का उत्पादन हुआ। जबकि मध्यप्रदेश में इस अनुपात में फर्नीचर निर्माण लगभग 5 प्रतिशत भी नहीं है।
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वर्जन-
मध्यप्रदेश में अभी फर्नीचर उद्योग की स्थिति ठीक नहीं है, जबकि हम देश के बड़े लकडी उत्पादक राज्य है। फर्नीचर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए निगम ने प्रोजेक्ट तैयार किया है। 6 माह में यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतर जाएगा।
राजीव शर्मा, एमडी, मप्र हस्तशिल्प विकास निगम
Published on:
05 Feb 2020 06:16 am
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