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MP की इन सीटों से चुने गए थे दो-दो विधायक, दीवार पर लिख किया प्रचार

अतीत के झरोखे से: 1957 में बैरसिया-विदिशा की सीट पर हुआ पहला चुनाव...

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Preparation for Elections

भोपाल@राधेश्याम दांगी की रिपोर्ट...
वर्ष 1957 में पहली बार चुनाव हुए तो संभाग की बैरसिया व विदिशा विधानसभा सीटों से 4 विधायक बने। इन पर पहली और आखिरी बार दो-दो विधायकों ने प्रतिनिधित्व किया।

आरक्षित सीटें होने से एक अनुसूचित जाति और दूसरा सामान्य वर्ग से विधायक चुना गया। विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी दोनों को विधायक माना गया। चारों विधायक इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी से जीते थे।

बैरागढ़-गोविंदपुरा-दोराहा था बैरसिया में
1957 से लेकर 62 तक बैरसिया विधानसभा सीट बहुत बड़ी थी। इसमें वर्तमान गोविंदपुरा सीट के रासलाखेड़ी सहित कई गांव शामिल थे। वहीं बैरागढ़ और सीहोर का दोराहा क्षेत्र था।

यहां के लोग चुनाव तो जानते थे, लेकिन राजनीति को इतना नहीं समझ पाते थे। उस समय न तो जनता के सामने कोई मुद्दे थे और न ही कोई विकास के वादे प्रचार में किए गए थे।

गांव में चौपाल पर मांगते थे वोट
उस समय कांग्रेस, हिंदू महासभा और कम्युनिष्ट पार्टी थी। सिर्फ दीवार लेखन से ही प्रचार होता था। 1957 के चुनाव में ठाकुर भगवान सिंह विधायक हुए।

बैरसिया निवासी उनके बेटे महेंद्र सिंह सिसोदिया का कहना है कि उम्मीदवार गांव के पटेल या प्रधान के साथ चौपाल पर अपनी बात रखता था।

ये चुने गए थे पहले विधायक
बैरसिया सीट से 1957 में हरी कृष्ण सिंह को 15267 (21.72 फीसदी ) और भगवान सिंह को 13124 (18.67 फीसदी) वोट मिले थे। मैदान में शंकर दयाल, भैयालाल, पन्नाला, गोविंद प्रसाद, मोतीलाल और होलाराम थे।

विदिशा से हीरालाल पिप्पल को 24753 (27.28 प्रतिशत) वोट मिले थे। दूसरे प्रत्याशी अजय सिंह को 22543 (24.85 प्रतिशत) वोट मिले।

पटियों पर चर्चा है:जनसंपर्क सेे उड़ गई अच्छे-अच्छों की नींद...
सोमवार को मुख्यमंत्री ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में बागसेवनिया स्थित विश्वकर्मा मंदिर से जनसंपर्क शुरू किया। कार्यकर्ताओं को रविवार रात 12 बजे पार्टी दफ्तर से फोन कर सूचना दी गई कि सोमवार सुबह सीएम साहब क्षेत्र में पहुंचेंगे।

इसके बाद गौर समर्थक और यहां से टिकट की दौड़ में खड़े भाजपा के लोगों की नींद उड़ गई। वे यह सोच कर चिंतित हो गए कि मुख्यमंत्रीजी कहीं गोविंदपुरा से ही तो चुनाव नहीं लडऩे वाले हैं।

नगर निगम में जलोटा को लेकर कनकही -
हा ल ही में चुनाव आयोग ने नगर निगम के तीन अफसरों को हटा दिया। तीनों की जगह अन्य अफसरों को पदस्थ किया जाना है। इसी बीच सोमवार को यहां पी.जलोटा की पदस्थापना को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा आम हो गई।

उनको लेकर नगर निगम के कर्मचारियों में तरह-तरह की बातें शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने पी. जलोटा को अनूप जलोटा समझ लिया। इस पर खूब ठहाके लगे।

लक्ष्मण रेखा :केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री शासकीय स्टाफ और वाहन नहीं रख सकते साथ...
आगामी दिनों में चुनाव प्रचार शुरू होंगे, सभाएं कराई जाएंगी। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री किसी सभा के दौरान अपने साथ सरकारी वाहन और कर्मचारी को नहीं रख सकते।

ऐसी शिकायत मिलती है तो इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। अगर कोई लोकहित में यात्रा करता है तो इसकी सूचना संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को देनी होगी।

इस दौरान मंत्री कोई भी चुनावी सभा नहीं कर सकते, न किसी कैम्पेन में भाग ले सकते हैं। केवल इसी स्थिति में स्टाफ और सरकारी गाड़ी का उपयोग किया जा सकता है।

यहां करें शिकायत : कलेक्टोरेट में कंट्रोल रूम बनाया गया है। 1950 के अलावा 2742300, 2730395 नंबरों पर आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत कर सकते हैं। पुलिस कंट्रोल रूम में भी शिकायत की जा सकती हैं। यहां से सभी शिकायतें कलेक्टोरेट स्थित कंट्रोल रूप ट्रांसफर की जाती हैं।