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बदलने वाला है महाकाल का रूप, पांच दिन तक दिखेगा कभी मन महेश, उमा महेश तो कभी जटाशंकर का स्वरूप

महाकाल के ये अलग-अलग स्वरूप आपके मन को मोह लेंगे। अब अगर आपके मन भी यही सवाल आ रहा है कि आखिर कब दिखेगा ये शानदार नजारा, तो जरूर पढ़ें ये पूरी खबर...

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प्रदेश से लेकर देश और दुनियाभर में मशहूर ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में एक बार फिर अद्भुत और मनमोहक नजारे दिखाई देंगे। खुद भगवान महाकाल भी अपने अलग-अलग स्वरूप में नजर आने वाले हैं। तो अगर आप भी आज या कल में महाकाल जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो कुछ दिन जरा ठहर जाएं, वरना ये खूबसूरत मौका आप मिस कर सकते हैं। महाकाल के ये अलग-अलग स्वरूप आपके मन को मोह लेंगे। अब अगर आपके मन भी यही सवाल आ रहा है कि आखिर कब दिखेगा ये शानदार नजारा, तो जरूर पढ़ें ये पूरी खबर...

दरअसल धार्मिक नगरी उज्जैन के महाकाल मंदिर में धर्म, संस्कृति और लोककला का महापर्व उमा सांझी महोत्सव शुरू होने जा रहा है। इस बार इसकी शुरुआत 10 अक्टूबर से होगी। पांच दिवसीय यह आयोजन 14 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक झांकियां तथा सांझी सजाई जाएगी। भगवान महाकाल मन महेश रूप में कोटि तीर्थ कुंड में नौका विहार करेंगे। इन पांच दिनों में हर दिन शाम को लोक कलाकार गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देंगे। ग्वालियर के ढोली बुआ नारदीय संकीर्तन से भक्तों को हरि कथा सुनाएंगे।

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हर साल अश्विन कृष्ण एकादशी पर होता है आयोजन

जानकारी के मुताबिक ज्योतिर्लिंग की परंपरा के अनुसार अश्विन कृष्ण एकादशी से अमावस्या तक पांच दिन उमा सांझी महोत्सव मनाया जाता है। इस बार यह आयोजन 10 से 14 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। 10 अक्टूबर को सुबह घट स्थापना तथा शाम को वसंत पूजा की जाएगी। पांच दिन तक मंदिर के पुजारी, पुरोहित सभा मंडप में रंगोली के रंग से किला कोट, रंग महल, उमा महल आदि की सांझी सजाएंगे। साथ ही शिव पार्वती के विभिन्न स्वरूपों की झांकी भी इस दौरान देखने को मिलेगी।

रात्रि जागरण भी

भगवान महाकाल इन पांच दिनों में कभी मन महेश, उमा महेश तो कभी जटाशंकर आदि रूपों में कोटितीर्थ कुंड में नौका विहार करते नजर आएंगे। वहीं हर दिन शाम 7 बजे सांस्कृतिक सांझ का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोक कलाकार गीत, संगीत व नृत्य की प्रस्तुति देंगे। अमावस्या पर रात्रि जागरण के साथ उत्सव का समापन होगा। इसके बाद माता पार्वती अश्विन शुल्क द्वितीया जिसे चंद्र दर्शन की दूज कहा जाता है, उस दिन रजत पालकी में सवार होकर सांझी विसर्जित करने शिप्रा तट जाएंगी। शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से शाही ठाठबाट के साथ उमा माता की सवारी निकाली जाएगी।

कलाकारों से मांगे आवेदन

मंदिर प्रशासन की ओर से उमा सांझी उत्सव में प्रस्तुति देने के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 1 अक्टूबर है।

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