
भोपाल. कुछ साल पहले जबलपुर की वंदना अग्रवाल के दुधमुंहे बच्चे की तबीयत बिगड़ी। जांच में मिलावटी दूध का सेवन करने की बात सामने आई। बच्चे के स्वस्थ होते ही परिवार इस पर सोचने को विवश हो गया। इसके बाद घर की महिलाओं ने डेयरी शुरू करने की ठानी। वंदना और मोनिका अग्रवाल की पहल पर 2015 में उमरिया चौबे पनागर में महालक्ष्मी डेयरी फॉर्म ने आकार लिया। अब अग्रवाल परिवार डेयरी उत्पादों में ब्रांड बनता जा रहा है। डेयरी संचालिका वंदना अग्रवाल बताती हैं कि आने वाले समय में एक ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म शुरू कर रहे हैं। इसमें 150 फीमेल काफ को तैयार किया जाएगा।
परिवार ने शुरुआत में डेयरी के लिए किराये पर जमीन ली और बैंकों से लोन भी लिया- पहले परिवार की पहचान डॉक्टरी पेशे से थी, लेकिन इस छोटी सी घटना ने परिवार की दिशा ही बदल दी। परिवार ने शुरुआत में डेयरी के लिए किराये पर जमीन ली और बैंकों से लोन भी लिया। संचालक वंदना का दावा है कि यहां का दूध सोने की तरह शुद्ध है। होम डिलेवरी के लिए ऐप आधारित व्यवस्था है। ऐप डाउनलोड करने के बाद उपभोक्ता को क्यूआर कोड दिया जाता है। पहले दिन ट्रायल पैक देते हैं। फिर डिलेवरी शुरू की जाती है।
40 को रोजगार:
शुरुआत पांच पशुओं से हुई थी। आज 230 भैंस हैं। 40 कर्मचारी हैं। रोजाना 1700 लीटर दूध निकलता है। डेयरी संचालिका वंदना अग्रवाल बताती हैं कि आने वाले समय में हम लोग एक ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म शुरू कर रहे हैं। इसमें लगभग एक साल में 150 फीमेल काफ को तैयार किया जाएगा।
Published on:
26 Dec 2022 01:52 pm
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