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भोपाल। हर साल की तरह 2 अक्टूबरको गांधी जयंती है। पूरा देश मोहनदास करमचंद गांधी यानी देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन मनाएगा। कहीं स्वच्छता अभियान चलेगा, कहीं उनके जीवन के सिद्धांतों, कर्मों को याद किया जाएगा। इस अवसर पर भोपाल से उनका नाता भी याद आ ही जाता है। ये नाता कोई रिश्ता या इंसान से नहीं बल्कि यहां स्थित बेनजीर मैदान में हुई उनकी सभा का जिक्र, नवाबी दौर में नवाबों और आम जनता के बीच उनकी यादों का ऐतिहासिक जिक्र है। देश की आजादी से पहले 1929 में महात्मा गांधी पहली बार भोपाल आए। यहां बेनजीर पार्क में उनका पहला सम्बोधन ऐसे कई ऐतिहासिक और रोचक किस्से जानें आप भी...
बेनजीर पार्क में पहला सम्बोधन
* महात्मा गांधी ने रॉयल मार्केट पर ताजुल मसाजिद से सटे बेनजीर महल व मोतिया तालाब से सटे बेनजीर ग्राउंड पर 1929 में पहली बार भोपाल आगमन पर आजादी को लेकर सभा ली थी।
* यह आजादी से पहले का दौर था। जब महात्मा गांधी पूरे भारत में अंग्रेजों के खिलाफ जनमत बना रहे थे।
* तब भोपाल अपने आप में ही एक बड़ी रियासत था।
* यहां नवाबों का शासन था।
* दुनियाभर में अहिंसा की अलख जगाने वाले बापू जब पहली बार भोपाल आए, तब उन्हें देखने उनसे मिलने नवाब ही नहीं बल्कि भोपाल की पूरी जनता बेनजीर मैदान में थी।
* नवाब शाहजहां बेगम द्वारा समर रेस्ट हाउस के रूप में बनवाए गए बेनजीर महल के प्रांगण में स्थित मैदान में 10 सितम्बर 1929 को बापू की ऐतिहासिक जनसभा हुई थी।
* नवाब भोपाल की पूरी कोशिश यही थी कि बापू की भोपाल यात्रा के रेलमार्ग की सही जानकारी, प्लेटफार्म नंबर से लेकर प्रस्थान तक प्रत्येक जानकारी पूर्णतया गुप्त रखी जाए जिससे भोपाल के राष्ट्रवादी गतिविधियों में रुचि रखने वाले व्यक्ति तथा आमजन उनसे न मिल सके। परंतु बापू की रेल यात्रा के बीच खण्डवा से प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, कवि एवं पत्रकार, "कर्मवीर" के सम्पादक पं. माखन लाल चतुर्वेदी, श्री आगरकर सहित उनके साथ भोपाल में प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद बापू के साथ बने रहे। यह ऐतिहासिक सभा-स्थल दशकों से पूर्णतया उपेक्षित है।
इस बच्ची को दी थी अंगूठी
* वर्ष 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान महात्मा गांधी ने देश के कई हिस्सों में भ्रमण किा था।
* इस भ्रमण के दौरान बापू ट्रेन बदलने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके।
* प्रभात फेरी वालों से इसका समाचार शहर भर में फैल गया।
* तब भोपाल के लोग वहां बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।
* बापू ने वहां उन्हें न केवल संबोधित किया, बल्कि उपस्थित लोगों से दान की अपील भी की।
* तभी एक बच्ची को अंगूठी देने का एक रोचक किस्सा बना, जिसे गांधी जी के १५० रोचक किस्सों में शामिल किया गया है।
* हुआ ये था कि जब बापू भोपाल के लोगों के बीच थे। तब उस भीड़ में एक बच्ची की मुस्कराहट बापू को इतनी प्यारी लगी कि वे भावुक हो गए।
* उनका दिल जीतने वाली उस बच्ची को बापू ने अपनी अंगूठी उतार कर दे दी थी।
तब स्टेशन पर उमड़ा था भोपाल
* बात 1933 की है जब बापू भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंच रहे हैं, इस बात की सूचना भोपालवासियों को हुई, तो रेलवे स्टेशन पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था।
* यह संकेत था कि भोपाली जनता के बीच बापू कितने लोकप्रिय और अपने थे।
नहीं कोई तस्वीर
* इतिहासकार बताते हैं कि महात्मा गांधी के भोपाल पहुंचने और यहां नवाबी दौर में उनके बीच रहने के महात्मागांधी के कई प्रमाण हैं।
* पर उन प्रमाणों को आप तस्वीरों में नहीं देख सकते, क्योंकि उन यादों की कोई तस्वीर नहीं मिलती।
* इस बात से कई बार इतिहासकार नाराज भी नजर आते हैं कि भोपाल प्रवास के महात्मा गांधी की कोई तस्वीर ही नहीं है।
* जबकि वर्ष 1929 और 1933 के भोपाल प्रवास के दौरान वे नवाब हमीदुल्ला खां के साथ उनके घर पर ही वक्त बिताया।
* नवाबों के महलों में उनके मेहमानों की तस्वीरों की संख्या सैकड़ों में है, पर बापू के भोपाल प्रवास की एक भी तस्वीर इन महलों में नहीं है।
* ऐसे में सवाल उठता है कि भोपाल रियासत में फोटोग्राफी की तमाम सुविधाएं होने के बावजूद महात्मा गांधी की एक भी तस्वीर नहीं खींची गई?
यहां रुकते थे बापू
* नवाब भोपाल के आवास अहमदाबाद पैलेस के समीप स्थित रही इस शानदार इमारत का सदुपयोग वी.आई.पी. गेस्ट हाउस के रूप में होता था।
* महात्मा गांधी खादी से सजी इस इमारत में 8 सितंबर से 10 सितंबर 1929 तक रहे।
* 9 सितंबर को इसके प्रांगण में प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी।
* इसमें बापू के साथ बा एवं मीराबेन सहित अन्य आमंत्रित अतिथियों तथा नवाब भोपाल परिवार ने भी भाग लिया था।
* प्रवास के २० वर्ष बाद बापू के इस इमारत में भोपाल विलीनीकरण के संबंध में विचार विमर्श तथा एग्रीमेंट साइन करन रियासत विभाग के सचिव वी. पी. मेनन के अनेकों बार भोपाल चक्कर लगे, उन्हें इसी राहत मंजिल में ही ठहराया गया।
Published on:
01 Oct 2017 02:21 pm
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