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एमपी में गौवंश के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव

Lakhan Patel- भोपाल में "गौ सेवा से राष्ट्र निर्माण" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

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Major Changes in Budget and Policies for Cattle in MP

Major Changes in Budget and Policies for Cattle in MP - AI picture (patrika)

Lakhan Patel- मध्यप्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसके अंतर्गत अब सरकार गोशालाओं के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपये की राशि प्रदान कर रही है। स्वावलंबी मॉडल गौशालाओं के अंतर्गत सरकार 130 एकड़ जमीन और 5000 गायों के पालन के साथ सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन मॉडल पर काम कर रही है। प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी राज्‍यमंत्री लखन पटेल ने यह बात कही। वे सोमवार को 'गौ-सेवा से राष्ट्र निर्माण' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मंत्री लखन पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल एक पशु का नहीं, बल्कि माता का रहा है।

संगोष्ठी पर प्रदेश में गौ-संवर्धन एवं संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों और जन प्रतिनिधियों ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान गौ-संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई।

राज्‍यमंत्री लखन पटेल ने कहा मध्यप्रदेश सरकार ने अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम बदलकर गौपालन पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग कर दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव योजना तैयार की गई है। इसके तहत लगभग 130 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी, जहां न्यूनतम 5 हजार गौमाताओं के साथ बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से स्वावलंबी इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गौशालाओं में सीएनजी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पादन, ब्रीडिंग और सोलर ऊर्जा जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे।

गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर

विशेष रूप से गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे। राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि 5 हजार गौमाताओं की क्षमता वाली इन गौशालाओं में भविष्य में 15 से 20 हजार तक गौवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और गौशालाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी। प्रदेश के 32 जिलों में इस योजना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर जारी किए जा चुके हैं। दमोह जिले में इस मॉडल की पहली गौशाला स्थापित की जा रही है। यह मॉडल पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।