
तैयार होने के बाद कुछ ऐसा होगा डिजाइन
भोपाल। मानव संग्रहालय में कांगड़ा गेट की तर्ज पर एक और गेट बनाया जाएगा। इस गेट में असम में गुवाहाटी से करीब 150 किलोमीटर माजुली द्वीप की नदी सभ्यता की सांस्कृतिक झलक दखेगी। बड़ा तालाब की तरफ से आने वाले रास्ते पर ये गेट बनेगा। इस गेट में फेसिटिलेशन सेंटर के साथ टिकट विंडो भी रहेगी, जहां दर्शकों को संग्रहालय की पूरी जानकारी के साथ नदी सभ्यता को भी समझने का मौका मिलेगा।
माजुली द्वीप पर 36 से ज्यादा गांव हैं। द्वीप पर कमालाबारी सत्रा की कला पर बेस्ड गेट तैयार किया जाएगा। द्वीप पर बसे गांव में सत्रा उसे कहा जाता है जहां ब्रह्मचारी अपने गुरु के साथ आश्रम में रहते हैं। इन आश्रमों के बाहर भी इस तरह के गेट तैयार किए जाते हैं। इन पर वैष्णव संप्रदाय की संस्कृति देखने को मिलती है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कृष्ण ने यहीं 16 हजार पटरानियों से विवाह किया था। इस क्षेत्र में वैष्णव संप्रदाय की झलक साफ देखने को मिलती है।
क्रांकीट और वुडन का होगा यूज
मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. सरित कुमार चौधुरी के अनुसार गेट वुडन और क्रांकीट से तैयार किया जाएगा। वहां के कारगीर इस पर आसपास के गांव और वैष्णव संप्रदाय के कल्चर को उकेरेंगे। ये गेट करीब 15 फीट चौड़ा और 20 फीट ऊंचा होगा। वहां के कल्चर की स्टडी के लिए एक टीम माजुली आईलैंड भेजी गई थी।
अक्टूबर से शुरू होगा काम
अभी बड़ा तालाब वाले रास्ते पर लोहे का सामान्य गेट लगा है। एक हट में सिर्फ टिकट विंडो है। यहां से आने वाले दर्शकों को संग्रहालय से जुड़ी जानकारियां या ब्रोशर उपलब्ध नहीं हो पाते। गेट में बने फेसिटिलेशन सेंटर में उन्हें मानव सभ्यता से लेकर विभिन्न राज्यों की आदिवासी संस्कृति की जानकारी भी मिलेगी। अक्टूबर से इस गेट का निर्माण शुरू करने की योजना है। चार माह में ये गेट तैयार होकर दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा।
Published on:
21 Sept 2018 08:20 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
