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Passport adaalat : जुड़वा होने के कारण एक साल अटका रहा पासपोर्ट, अदालत में आकर सुलझा यह अनोखा मामला

रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में 6 दिवसीय पासपोर्ट अदालत

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भोपाल

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Vikas Verma

Apr 11, 2019

passport office

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भोपाल। पासपोर्ट से जुड़े वर्ष 2018 के लंबित प्रकरणों के लिए निराकरण के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की ओर से पासपोर्ट अदालत का आयोजन किया जा रहा है। आईएसबीटी स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में 10 से 12 अप्रैल और 23 से 25 अप्रैल तक चलने वाली इस पासपोर्ट अदालत में करीब 1500 आवेदक हिस्सा लेंगे। पहले दिन 250 आवेदकों में महज 55 आवेदक ही पहुंचे।

इस दौरान कुछ केस ऐसे थे जो एक पासपोर्ट आवेदक को जानना जरूरी है, आखिर पासपोर्ट होल्ड होने की क्या-क्या वजह हो सकती हैं। क्या आपको पता है कि कभी-कभी जुड़वा होना मुसीबत का सबब भी बन जाता है इसका उदहारण पासपोर्ट अदालत में देखने को मिला, जहाँ दो जुड़वा बहनों में से एक का पासपोर्ट इसलिए अटक गया, क्योंकि वो जुड़वा थीं। सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यह सच है...

नाम छोड़ सारे रिकॉर्ड एक जैसे थे इसलिए हुआ सिस्टम ऑब्जेक्शन

ग्वालियर की रहने वाली 25 वर्षीय अमृता और आंचल ट्विंस हैं। आंचल ने अक्टूबर 2017 में अपना पासपोर्ट बनवा लिया। लेकिन जब अमृता ने अप्रैल 2018 में पासपोर्ट के लिए ग्वालियर स्थित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) में ऑनलाइन आवेदन किया तो सिस्टम ने अमृता का पासपोर्ट इसलिए होल्ड कर दिया क्योंकि सिस्टम डेटाबेस में इस डेट ऑफ बर्थ, एड्रेस, पेरेंट्स नेम और सरनेम के साथ ऑलेरडी पासपोर्ट जारी हो चुका था। सिस्टम डेटाबेस के मुताबिक यह एक ही शख्स द्वारा अलग नाम से पासपोर्ट बनवाने का मामला था।

सिस्टम ऑब्जेक्शन के चलते अमृता की फाइल होल्ड हो गई। बुधवार को अमृता जब पासपोर्ट ऑफिस पहुंची तो पूरी हकीकत सामने आई। अमृता ने बताया इससे पहले जो पासपोर्ट जारी हुआ है वो आंचल के नाम से है, चूंकि हम दोनों ट्विंस हैं, लिहाजा हमारे नाम को छोड़कर हर चीज एक ही है। इसके बाद अमृता के पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर रश्मि बघेल ने बताया कि यह अपने तरह का पहला मामला है जिसमें ट्विंस होने के चलते सिस्टम ऑब्जेक्शन हुआ है।

एजेंट के कहने पर जानकारी छिपाना पड़ा महंगा, 5 हजार चुकाया जुर्माना

रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर रश्मि बघेल ने बताया कि पासपोर्ट अदालत में आवेदकों द्वारा जानकारी छिपाने के भी मामले आए। एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि जबलपुर से आई एक तलाकशुदा महिला को तलाक से पहले एक पासपोर्ट जारी हो चुका था। जिसकी वैधता खत्म होने पर महिला ने पासपोर्ट री-इश्यू कराने की जगह एजेंट के झांसे में आकर फ्रेश पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दिया।

महिला ने नए पासपोर्ट आवेदन में कहीं भी पुराने पासपोर्ट का जिक्र नहीं किया लेकिन सिस्टम ने नाम, एड्रेस और डेट ऑफ बर्थ आदि के आधार पर यह बता दिया कि महिला को इससे पहले भी एक पासपोर्ट जारी हो चुका है। जानकारी ना देने के चलते सिस्टम ऑब्जेक्शन के कारण फाइल होल्ड हो गई। पासपोर्ट अदालत में आकर महिला ने यह पूरा किस्सा सुनाया। पासपोर्ट ऑफिसर ने महिला को पासपोर्ट संबंधी जानकारी छिपाने पर 5 हजार रुपए की पेनाल्टी लगाकर पुराने पासपोर्ट को ही नए सरनेम से री-इश्यू करने का आदेश दिया।

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