16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेपकास्ट ने एनजीओ को भेजे थे 3 करोड़ रु.

जावद विधायक ओपी सकलेचा के भोपाल स्थित सरकारी आवास के पते का हुआ दुरुपयोग

2 min read
Google source verification
patrika

pattrika

भोपाल. मप्र विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी परिषद् (मेपकास्ट) में अनुदान बांटने में भी ‘खेल’ हुआ है। यह तक नहीं देखा जाता कि जिस एनजीओ को अनुदान दे रहे हैं, उसका पता भी सही है या नहीं।
इस प्रकरण की पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। मेपकास्ट ने जावद विधायक ओम प्रकाश सकलेचा के सरकारी निवास ई-44, 45 बंगला के पते पर एनजीओ को बीते सालों में तीन करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दे दिया। मौजूदा महानिदेशक डॉ.़ नवीनचंद्रा के अनुसार उनके समय से पहले ऐसा हुआ होगा। विधायक सरकारी आवास के पते पर ये अनुदान जारी हुआ है, वे इसे सामान्य स्थिति बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
ठ्ठ 29 सितंबर 2008 में सचिव, विज्ञान भारती ई-44, 45 बंगला के पते पर 60 हजार रुपए।
ठ्ठ 4 मार्च 2009 को अध्यक्ष, विज्ञान भारती ई-44, 45 बंगला के पते पर 10.71 लाख रुपए।
ठ्ठ 4 मार्च 2009 को अध्यक्ष विज्ञान भारतीय ई- 44, 45 बंगला भोपाल के पते पर 6.16 लाख रुपए दिए।
ठ्ठ एक जून 2009 को विजनाना भारती ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी ई-44, 45 बंगला के पते पर आइआइडब्ल्यूएम के लिए 78 लाख रुपए मंजूर।
ठ्ठ 16 अक्टूबर 2010 को अध्यक्ष विजनाना भारती ई-44, 45 बंगला के पते पर 6.50 लाख रुपए मंजूर।
ठ्ठ 3 मार्च 2010 को सचिव विज्ञान भारती ई-44, 45 बंगला के पते पर 15 हजार रुपए मंजूर।
(ये कुछ उदाहरण हैं। इस तरह तीन करोड़ रुपए से अधिक राशि बीते सालों में विधायक के पते पर एनजीओ ने मंजूर कराई।)

सीधी बात
ओपी सकलेचा, विधायक, जावद
क्त.आपके सरकारी निवास के पते का उपयोग एनजीओ मेपकास्ट से अनुदान लेने में कर रहे हैं, आपको जानकारी है?
मेपकास्ट और विज्ञान भारती के बारे में पता है। एडे्रस वाले मामले की जानकारी नहीं है।
क्त.आपके निवास के पते पर कोई लाखों रुपए का अनुदान कैसे ले सकता है?
बंगले पर कई लोग ठहरते हैं। विज्ञान भारती के लोग भी पहले ठहरते थे। हो सकता है, उन्होंने इस आधार पर ही पता दिया हो।
क्त. क्या इस तरह किसी का पता उपयोग करना ठीक है?
नहीं ये ठीक नहीं है, लेकिन अब हम इस पर कर ही क्या सकते हैं।