
मार्टिन लूथर किंग को पहले ही हो गया था अपनी मौत का आभास
भोपाल। भारत भवन में चल रहे तीन दिवसीय भोपाल लिटरेचर एण्ड आर्ट फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन विभिन्न विषयों पर लेखकों के 20 समानांतर सत्र आयोजित किए गए। अभिरंग में हुए ऑनली इन डार्कनेस कैन यू सी थे स्टार्स- मार्टिन लूथर किंग की लेखिका संतोष बकाया ने कनीज रजवी और राकेश अग्रवाल के साथ मंच साझा किया। उनका सत्र उनकी पुस्तक पर आधारित था जो किंग की एक गीतात्मक कहानी है। उन्होंने कहा कि किंग अहिंसा में विश्वास करते थे जो आज की जरूरत है। मार्टिन लूथर किंग को अंतज्र्ञान था कि वह जल्दी मर जाएगा। वह हमेशा अपनी पत्नी से कहते भी थे कि वह किसी भी दिन मर सकते है। किंग को सार्वभौमिकता में विश्वास था, वह हर किसी को उसी रूप में देखता है, जहां सब सामान हैं।
नाम लिए बिना ही व्यक्त हो सकता है प्यार
जैनिस पैरेट ने अपनी किताब द नाइन चेम्बरेड हार्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि ये पुस्तक प्रेम पर आधारित है जिसमे कुछ ऐसे पुरुष है जो महिलाओं का नाम लिए बिना प्रेम व्यक्त कर रहे है साथ ही इसमें उन पुरुषों के बारे में बताया गया है कि वे प्रेम के प्रति क्या सोचते है कि उनकी सोच उनके संबंध उनका व्यवहार महिला के प्रति दिखाया है वही सत्र की अध्यक्षता कर रही सीमा रायजादा ने पूछा कि आपके लिए प्रेम क्या है जवाब में लेखिका ने कहा कि स्वयं से प्रेम ही सबसे बड़ा प्रेम है वही मंच पर बैठे राघव चंद्रा ने पूछा कि आप अपनी जॉब के साथ अपनी लेखकी को बरकरार रख सकते हो तो लेखिका ने कहा ही अगर आप जॉब कर रहे हो तो आप अपनी लेखिकी या अपने किसी भी कला को मरने नही देते और आप सही तौर पे अपने कला को जस्टिफाई कर सकते हो।
मानव इतिहास प्रकृति को नष्ट करने के बारे में नहीं
अभिरंग में इनवायरमेंट एट ए प्रेसिपाइस पर इतिहासकार और पर्यावरण इतिहास विशेषज्ञ महेश रंगराजन ने अभिलाष खांडेकर और डॉ. मधु वर्मा से बात की। उन्होंने कहा कि पुस्तक के पीछे आइडिया पर्यावरणीय संकट है, यह युरोसेंट्रिक दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति के साथ संतुलन में नहीं रहते हैं। धन का सृजन कचरे के निर्माण से होता है। बेंगलुरु का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे कहा कि शहर को फिर से तैयार किया गया था और अब हम इसके प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। पर्यावरण प्रथाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण बनाते हैं, हम उन्हें समृद्ध करते हैं और फिर इसे नष्ट कर देते हैं।
Published on:
13 Jan 2020 02:13 pm
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