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मास्टर प्लान-2031: खेती की जमीन पर उद्योगों को छूट मिली तो बदल जाएगी शहर की आबोहवा

-मास्टर प्लान में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों को छूट देने की तैयारी

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Master Plan-2031

Master Plan-2031

भोपाल. आईटी सहित 744 किस्म के गैर प्रदूषणकारी उद्योग स्थापित करने के लिए खेती की जमीन बगैर शर्त मुहैया कराने की तैयारी है। मास्टर प्लान का नए मसौदे की आड़ में हो रहे इन प्रयासों का पर्यावरणविदों ने विरोध किया है। जानकारों की राय में यदि ऐसा हुआ तो शहर की आबोहवा हमेशा के लिए बदल सकती है। तर्क है कि सरकार उद्योगों को बगैर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के गैर प्रदूषणकारी का दर्जा दे रही है। उद्योग स्थापित करने से पहले और बाद में इन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी का नियम भी समाप्त किया जा रहा है। लैंड यूज बदलने के नियम भी बदले जा रहे हैं, जिससे शहर के बाहरी क्षेत्रों में 744 किस्म के इन उद्योगों के नाम पर कारखाने स्थापित किए जाएंगे, जिनकी निगरानी कठिन हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि सरकार तालाब और पर्यावरण बचाने के दावे कर रही है,जबकि इस मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां सुनी जा चुकी हैं और अफसर अब नियम बनाने में जुटे हैं।

प्रस्तावित कमर्शियल प्लानिंग एरिया
कोलूखेड़ी कलां- मध्यम उद्योग
आनंदीपुरा- आमोद-प्रमोद
बांदीखेड़ी- कृषि आधारित उद्योग
बालमपुर- आमोद-प्रमोद

यहां मिलेंगी उद्योगों की अनुमतियां
नजीराबाद
गुनगा
इस्लामनगर
लांबाखेड़ा
फंदा
मुगालिया छाप
समरधा कलियासोत
रतनपुर
आदमपुर छावनी

प्रोजेक्ट्स जिनसे हुआ इतना नुकसान
बीआरटीएस: मिसरोद से बैरागढ़ तक 22 किमी डेडिकेटेड बीआरटीएस लेन तैयार करने के लिए करीब 800 पेड़ों को काटा गया था। ये पेड़ 15 से 20 साल पुराने थे। 1500 ऐसे पेड़ काटे गए थे, जिनकी उम्र 5 से 10 वर्ष थी।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: टीटी नगर की 332 एकड़ जमीन पर लगे 40 साल पुराने एक हजार से ज्यादा पेड़ एरिया बेस्ड डवलपमेंट फॉर्मूले को पूरा करने काटे गए। बुलेवार्ड स्ट्रीट के लिए पॉलीटेक्निक तिराहे से एनआईटीटीआर संस्थान और आगे भदभदा तक 1500 पेड़ काटे जा चुके हैं।

744 किस्म के उद्योगों को इतनी छूट मिलने से प्रदेश स्तर पर खेती की जमीन की कमी पैदा हो जाएगी। इससे भोपाल का वायुमंडल बदल जाएगा। जो लोग अभी बाहरी इलाकों में खुले वातावरण में जीवन जी रहे हैं, उनकी जीवन शैली भी इससे प्रभावित होगी।
सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद्

प्रमुख आपत्तियों और सुझाव सूचीबद्ध किए हैं। भोपाल के मामले में सुनवाई की प्रक्रिया हो चुकी है। इस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर समिति करेगी।
सुनीता सिंह, संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी