
भोपाल। प्रदेश सरकार ने रेत खनन की नई नियमावली तैयार की है। नगर निगम सीमा की रेत खदानों में अवैध खनन हुआ तो महापौर और आयुक्त जिम्मेदार होंगे। इसी तरह ग्राम पंचायत की खदानों में अवैध खनन पर पंच-सरपंच जवाबदेह होंगे। नगर पालिका या परिषद में भी संबंधित जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अमला जिम्मेदार होगा।
इसके अलावा 50 घनमीटर से ज्यादा रेत रखने पर लाइसेंस अनिवार्य होगा। इसमें सरकारी रेत ठेकेदारों के लिए अलग प्रावधान किए जाएंगे। खनिज विभाग ने नई नियमावली का प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास भेज दिया है। इसमें निजी जमीन पर खनन करने के लिए लाइसेंस का प्रावधान भी है। इसका शुल्क प्रति लाइसेंस 5000 रुपए होगा। जबकि, अभी रेत की मात्रा के हिसाब से शुल्क लगता है। इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिल सकती है।
140 पंचायतों में ऑनलाइन बुकिंग
प्रदेश में अब तक महज 140 ग्राम पंचायतों की रेत खदानें से ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो पाई है। बाकी करीब 700 खदानों में पुरानी प्रक्रिया से रेत बेची जा रही है। हालांकि, इनमें से कई खदानें बंद हैं। इनकी वैधानिकता को लेकर भी उलझन की स्थिति है। बाकी खदानों से रेत की ऑनलाइन बुकिंग करने में अभी दो महीने का वक्त और लगना है। इन खदानों का ऑनलाइन के लिए मैपिंग और चिह्नांकन तो हो चुका है, लेकिन अपलोडिंग में समय लग रहा है।
तीस फीसदी ग्राम पंचायतों की खदानें ऑनलाइन हो चुकी हैं। बाकी के लिए प्रक्रिया चल रही है। नई नियमावली से अवैध खनन पर रोक लगेगी।
-मनोहर दुबे, सचिव, खनिज विभाग
पंचायतों को दी रेत खदानें तो 60% कम हुए अवैध खनन के मामले
रेत खदानें ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित होने के बाद अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 50-60 फीसदी मामले दर्ज होना कम हो गए हैं। पिछले चार साल के दर्ज मामलों को देखा जाए तो इस साल इनका ग्राफ गिरा है। खनिज विभाग ने चार साल पहले अवैध परिवहन के 6500 से अधिक प्रकरण दर्ज किए थे। आधा दर्जन गाडिय़ां भी राजसात की थीं। पहले खनिज विभाग जितने प्रकरण दर्ज करता था, उसमें 40 से 50 फीसदी मामले रेत के होते थे।
अभी यह बता पाना मुश्किल है कि रेत पंचायतों को देने से अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में कमी आई है या बढ़े हैं।
-विनीत आस्टीन, डायरेक्टर, खनिज संसाधन विभाग
Published on:
23 Apr 2018 07:33 pm
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