
विराज
भोपाल। जिस उम्र में बच्चों को वीडियो गेम्स में बाइक चलाने का क्रेज होता है उस उम्र में विराज बाइक से 30 फीट तक की जम्प करते नजर आते हैं। हर फैमिली अपने बालिग बच्चे को बाइक धीरे चलाने की नसीहत देते हैं। लेकिन विराज के पापा उन्हें तेज रफ्तार बाइक दौड़ाने को कहते हैं और वो भी सिर्फ सात साल की उम्र में, ऐसे में हर आम शख्स का हैरान होना लाजमी है।
इंदौर के विराज राठौर ऐसा ही कमाल कर रहे हैं, वो भी पिछले डेढ़ सालों से, इसके चलते अब उनका चयन ऑस्ट्रेलिया में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है। इस साल होने वाली इस रेस में विराज देश के सबसे कम उम्र के रेसर होंगे। इस रेस में मेजबान ऑस्ट्रेलिया के अलावा अमेरिका, कनाडा, चीन, इंडोनेशिया, जर्मनी, रूस, थाईलैंड, स्पेन, इटली आदि देशों के बाइकर्स चुनौती पेश करेंगे।
रविवार को राजधानी भोपाल में राइडर्स रेसिंग वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ऑटोक्रॉस मड चैलेंज रेस में देश के सबसे कम उम्र के राईडर विराज राठौड़ सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रहे। यहां विराज ने डेमो कैटेगरी में अपनी राइडिंग के हुनर दिखाकर यह बता दिया कि राइडिंग के लिए उम्र नहीं जज्बा होना चाहिए। डेमो कैटेगरी में ऑफ रोड राइडिंग के दौरान विराज ने कहा कि मुझे बड़े टेबल टॉप यानी लंबी जंप्स चाहिए, यहां का ट्रैक बहुत छोटा है।
विराज के पिता यशराज भी बाइक राइडर हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इवेंट में हिस्सा ले चुके हैं। यशराज ने बताया कि विराज हमेशा से ही लंबी जंप्स को पसंद करता है। विराज से पहले पुणे का युवराज कॉन्देय 85 सीसी (अंडर-16) वर्ग में हिस्सा ले चुका है जबकि विराज अंडर-12 वर्ग की 65 सीसी बाइक रेस में हिस्सा ले रहा है।
आरटीओ नहीं एफएमएससीआई जारी करता है लाइसेंस
राइडिंग के लिए बच्चों की विशेष तरह बाइक होती है। विराज के पास ऐसी 50 सीसी, 55 सीसी (जूनियर) और 65 सीसी (सीनियर) बाइक हैं। विराज जो गाड़ी चलाते हैं उसकी कीमत 5 लाख रूपए है। इसे चलाने के लिए फेडरेशन ऑफ मोटर स्पोट्र्स क्लब इंडिया (एफएमएससीआई) का लाइसेंस भी है। रेसिंग के लिए दिया जाने वाला लाइसेंस आरटीओ के अधीन नहीं आता है, रेसिंग लाइसेंस सिर्फ ट्रैक के लिए ही जारी होता है।
4 साल की उम्र से शौक, घर के रेसिंग ट्रैक पर करते हैं प्रैक्टिस
इंदौर के सत्यसाईं विद्या विहार के तीसरी क्लास में पढऩे वाले विराज को चार साल की उम्र से ही बाइक चलाने का शौक है। पिता यशराज ने शौक देखकर घर के पास ही रेसिंग ट्रैक बनवा दिया। रोज 3 से 4 घंटे प्रैक्टिस करने लगा। एक साल में ही विराज ने गोवा में एमआरएफ मोटो ग्रुप सुपर क्रॉस बाइक रेस में दूसरा स्थान प्राप्त किया। विराज की दिनचर्या संयमित है, वे सुबह 6 बजे उठकर जिमनास्टिक करते हैं। इसके बाद रनिंग और साढ़े सात बजे स्कूल जाते हैं, शाम साढ़े चार बजे लौटकर ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं।
Published on:
21 Jan 2019 02:19 pm
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