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पिछली बार 748 मीटर दूर से ही लौटना पड़ा था, इस बार तय कर लिया था… जब तक एवरेस्ट नहीं चढूंगी, तब तक हिम्मत नहीं छोडूंगी

8848 मीटर की ऊंचाई वाले माउंट एवरेस्ट समिट को कम्प्लीट करने वाली मप्र की पहली महिला पर्वतारोही बनी मेघा परमार

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भोपाल

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Vikas Verma

May 31, 2019

 megha parmar from madhya pradesh to climb mount Everest

megha parmar from madhya pradesh to climb mount Everest

भोपाल। पिछले साल यही महीना था जब खबर आई कि 23 मई 2018 को सुबह 10.45 बजे मेघा परमार ने एवरेस्ट फतेह किया और यह कारनामा करने वाली मेघा मप्र की पहली महिला बन गईं। कुछ मीडिया हाउस (पत्रिका नहीं) ने यह झूठी खबर प्रचारित की गई। लेकिन उस वक्त 748 मीटर पहले ही सेहत बिगडऩे के कारण मेघा को वापस लौटना पड़ा था। उस वाकये के पूरे एक साल बाद 22 मई 2019 को सुबह 5 बजे 25 बरस की मेघा ने आखिरकार एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा फहराकर एवरेस्ट समिट कम्प्लीट किया। मेघा 29 मई को देर रात फ्लाइट से भोपाल पहुंची और गुरुवार सुबह पत्रिका डॉट कॉम से विशेष बातचीत के दौरान एवरेस्ट समिट के एक्सपीरियंस शेयर किए।

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कैंप-2 से एवरेस्ट समिट तक की कहानी मेघा परमार की जुबानी


सागर माथा समिट की शुरूआत 18 मई की रात कैंप-2 से की। बर्फ से ढकी पहाडिय़ों पर रात भर चढ़ाई करके अगली सुबह कैंप-3 पहुंची। इस दौरान समिट के सफर में साथ चल रहे शेरपा और एवरेस्ट समिट ग्रुप के सदस्य व मेरे गाइड रत्नेश पांडे भी साथ रहे। कैंप-3 में कुछ समय गुजारने के बाद मैंने आगे का सफर शुरू किया। एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने की जिद ने पहाड़ पर बिछी बर्फ की सफेद चादर और तेज बर्फीली हवाओं से सफर की बाधाओं को हरा दिया। शेरपा और गाइड रत्नेश सर के साथ मैं 20 मई को एवरेस्ट के कैंप-4 में पहुंची। 7900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट के कैंप-4 से शिखर महज 948 मीटर दूर था। मुझे 20 मई की रात को ही एवरेस्ट समिट के लिए कैंप-4 से रवाना होना था। लेकिन शाम के वक्त अचानक मौसम खराब हो गया। करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगी, जोकि किसी भी शख्स को तिनके की तरह उड़ाने के लिए काफी थी। हमने कैंप में ही करीब & घंटे तक हवाओं के थमने का इंतजार किया लेकिन हवा नहीं थमी। इसके चलते हमें अगले दो दिन (20 और 21 मई) तेज बर्फीली हवाओं के बीच कैंप-4 में ही रुकना पड़ा। 21 मई को दोपहर बाद जब बर्फीली हवाओं की रफ्तार कुछ कम हुई तो नेपाल के माउंटेनिंग एसोसिशन से जुड़े शेरपाओं ने कैंप-4 से एवरेस्ट समिट के सफर को शुरू करने की परमीशन दी। मौसम सामान्य होने के कुछ घंटों बाद 21 मई की रात मैं कैंप से तिरंगा और सीहोर की मिट्टी लेकर रवाना हुई, चूंकि पिछले साल मुझे इस हाइट से वापस आना पड़ा था लिहाजा इस साल मैं एक जख्मी शेरनी की तरह थी जिसे किसी भी हाल में समिट कम्प्लीट करना था। और 22 मई की सुबह करीब 5 बजे मैंने 8,848 मीटर की ऊंचाई वाले एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा फहराकर एवरेस्ट समिट कम्प्लीट करने का सपना पूरा किया।

भावना से 3 घंटे पहले कम्प्लीट किया समिट

सीहोर जिले के भोज नगर की 25 वर्षीय मेघा परमार के पिता दामोदार परमार किसान हैं और मां मंजू देवी हाउसवाइफ। मेघा को माउंट एवरेस्ट समिट की प्री-ट्रेनिंग मध्यप्रदेश के पर्वतारोही रत्नेश पांडे ने दी थी। आपको बता दें, 22 मई को ही छिंदवाड़ा के तामिया की रहने वाली 27 वर्षीय भावना डेहरिया ने भी एवरेस्ट समिट कंपलीट किया था। हालांकि मेघा ने यह समिट भावना से करीब 3 घंटे पहले ही पूरा कर लिया था। मेघा ने बताया कि जब मैं नीचे लौट रही थी तो तब भावना दीदी भी मिलीं, उन्होंने मुझे समिट कम्प्लीट करने पर बधाई दी, मैंने भी उन्हें समिट तक जाने के लिए बधाई दी।