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सूफियाना शाम : कसक दिल की दिल में चुभी रह गई…

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन मुंबई की विख्यात गायिका और गजल के उस्ताद राजकुमार रिजवी की बेटी रूना रिजवी  ने अपने फ्यूजन के अंदाज से शाम को खास बना दिया।

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sanjana kumar

Jul 18, 2016

Melody evening,Runa Rizvi,bhopal,mp

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भोपाल। सूफी जिनकी आवाज है, संगीत जिनकी रुह है और गजल जिनका हुनर है। हुनर की ऐसी बेहतरीन गायिका रूना रिजवी ने रवीन्द्र भवन के मंच पर जब अपने सुरों से शाम को सूफियाना किया तो श्रोता झूम उठे। रविवार को मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम जश्न-ए-ईद का समापन हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन मुंबई की विख्यात गायिका और गजल के उस्ताद राजकुमार रिजवी की बेटी रूना रिजवी की प्रस्तुति हुई। रूना ने अपने फ्यूजन के अंदाज से शाम को खास बना दिया।

रूह में उतरती गईं रूना

'ताजदारे हरम, हो निगाह ए करम', 'मन कुंतो मौला, फाहाज अली उन मौला', 'निम जाना जोगी', 'ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गई' जैसे बेहतरीन गानों और नज्मों से सजी शाम शहरवासियों की रूह में उतर गई। रूना ने शहर की तहजीब और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए एक से बढ़कर एक नज्में पेश की।

Runa Rizvi

उन्होंने अपने पिता की कुछ कंपोजीशन और बशीर बद्र साहब, बद्र वास्ती, जावेद अख्तर, गालिब साहब की नज्मों को अपने अंदाज में पेश किया। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने 'शहर के दुकानदारों कारोबार ए उल्फत में' और आबिदा परवीन की 'जी चाहे शीशा बन जा, जी चाहे पैमाना बन जा' भी पेश किया। उनके साथ तबले पर प्रशांत सोनागरा, कीबोर्ड पर धर्मेश, ढोलक पर सुरेंद्र और वॉयलिन पर राशिद ने संगत दी।

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