अतिरिक्त लोक अभियोजक महू शेखर बुंदेला ने बताया कि आरोपी मनीष ने अपने आपको जनसंपर्क विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर तथा समाचार पत्र का कथित व फर्जी रिपोर्टर बताकर कोदरिया तहसील महू जिला इंदौर निवासी कलावती वर्मा से उसके 4 पुत्रों को नौकरी लगाने के लिए 21 लाख रुपए लिए थे। पुत्र विवेक वर्मा को मुख्यमंत्री सचिवालय में निजी सचिव, वरुण वर्मा को सहायक खाद्य अधिकारी, तीसरे पुत्र को सहायक प्रशासनिक अधिकारी एवं पुत्र वैभव को अपेक्स बैंक भोपाल में कलर्क के रूप में पदस्थापना दिलाने हेतु फर्जी आदेश लाकर दिए थे। इन आदेशों के आधार पर किसी भी पुत्र की नौकरी नहीं लगी। फरियादी कलावती वर्मा जो इन्फेंट्री स्कूल में वरिष्ठ लेखापाल के पद पर थी,ने बताया कि आरोपी पीलीबत्ती की गाड़ी में बैठकर महू शहर में आकर उससे रुपए लिए थे। धोखा खाने के बाद फरियादी ने महू थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। कोतवाली पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471 में चालान प्रस्तुत किया था। न्यायालय के समक्ष फरियादी सहित उसके पुत्रों एवं अपेक्स बैंक भोपाल के एमडी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर, इंटलीजेंस विभाग के अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी सहित अन्य संबंधित साक्षियों के बयान कराए गए थे। न्यायालय ने आरोपी को धारा 420, 467, 468, 471 में दोषी पाते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 16 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय यह भी आदेशित किया गया है कि अपील अवधि के पश्चात 16 लाख रुपए फरियादी कलावतीबाई को दिए जाए। प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त ोक अभियोजक महू शेखर बुंदेला ने पैरवी की थी।