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बिसेन-शुक्ल को किन मंत्रियों से छीनकर दिए जाएंगे पसंदीदा विभाग

शिवराज मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्री शामिल किए गए हैं। गौरीशंकर बिसेन, राजेंद्र शुक्ल और राहुल लोधी को मंत्री बनाया गया है। इनमें गौरीशंकर बिसेन और राजेंद्र शुक्ल का सियासी कद काफी बड़ा है, जिससे उन्हें अहम विभाग ही मिलेंगे।

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अहम विभाग ही मिलेंगे

शिवराज मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्री शामिल किए गए हैं। गौरीशंकर बिसेन, राजेंद्र शुक्ल और राहुल लोधी को मंत्री बनाया गया है। इनमें गौरीशंकर बिसेन और राजेंद्र शुक्ल का सियासी कद काफी बड़ा है, जिससे उन्हें अहम विभाग ही मिलेंगे। सवाल ये है कि ऐेसे में किन मंत्रियों के विभागों को छीनकर बिसेन और शुक्ल को संतुष्ट किया जाएगा! कुल मिलाकर बिसेन-शुक्ल को विभाग बंटवारा बड़ी चुनौती है।

नए मंत्रियों के शामिल होने से राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल होने की स्थिति बन गई है। ये बहुत चुनौतीपूर्ण भी है। बिसेन लंबे समय तक कृषि और राजेंद्र शुक्ल ऊर्जा विभाग के मंत्री रहे। इन्हें यही विभाग ज्यादा पसंद रहे हैं। अभी कृषि विभाग कमल पटेल और ऊर्जा विभाग सिंधिया समर्थक प्रधुम्न सिंह तोमर के पास है। इनसे यह विभाग लेने का मतलब, इन्हें नाराज करना होगा। ऐसे में सरकार के लिए मुश्किल होगी।

खनिज विभाग बृजेंद्र सिंह, उद्योग विभाग राजवद्र्धन सिंह दत्तीगांव के पास है। दोनों सिंधिया समर्थक हैं। उनसे विभाग लेना भी मुश्किल है। बिसेन का पसंदीदा कृषि विभाग कमल पटेल के पास हैं। पटेल से भी विभाग लेना आसान नहीं। सहकारिता विभाग अरविंद भदौरिया के पास हैं। वे शिवराज खेमे से हैं तो उनसे विभाग लिया जा सकता है। ऐसा करने पर दूसरा भारी विभाग देना होगा, जो दुष्कर रहेगा।

जनसंपर्क विभाग खुद सीएम शिवराजसिंह के पास है, वो ये दे सकते हैं। शुक्ल के पास पूर्व में जनसंपर्क विभाग रहा है। सीएम ये विभाग उन्हें दे सकते हैं। अभी सीएम शिवराज के पास महिला एवं बाल विकास, विमानन, सामान्य प्रशासन और नर्मदा घाटी विभाग भी हैं। सामान्य प्रशासन में राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार हैं।

इस बीच शनिवार को सीएम ने ऊर्जा मंत्री तोमर को बुलाया था। इससे ये भी माना गया कि विभागीय बंटवारे को लेकर कोई चर्चा हुई हो।

मंत्रियों को विभाग बंटवारे की मशक्कत शुरू हो गई है। पीएचई और वाणिज्यिक कर विभाग भी नए मंत्रियों को दिया जा सकता है। इनमें पीएचई में अभी राज्यमंत्री हैं, जबकि वाणिज्यिक कर विभाग जगदीश देवड़ा के पास है। वे वित्त विभाग का भी कामकाज देख रहे हैं।

गौरीशंकर बिसेन
पीएचई, सहकारिता व कृषि मंंत्री रहे। सातवीं बार के विधायक हैं।

राजेंद्र शुक्ल
वन, जैव विविधता, खनिज, ऊर्जा, उद्योग, जनसंपर्क मंत्री रहे। चौथी बार के विधायक।

राहुल लोधी
पहली बार के विधायक। राज्यमंत्री के तौर पर सहयोगी बन सकते हैं।

14 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग
नरोत्तम मिश्रा: गृह, जेल, विधि, संसदीय कार्य
गोपाल भार्गव: पीडब्ल्यूडी, कुटीर-ग्रामोद्योग
तुलसी सिलावट: जल संसाधन, मछली पालन
गोविंद सिंह राजपूत: राजस्व और परिवहन
बृजेंद्र प्रताप सिंह: खनिज और श्रम
विश्वास सारंग: चिकित्सा शिक्षा, गैस त्रासदी पुनर्वास
प्रेमसिंह पटेल: सामाजिक कल्याण और पशुपालन
ओमप्रकाश सखलेचा: आईटी और एमएसएमई
उषा ठाकुर: संस्कृति, पर्यटन और धर्मस्व कल्याण
अरविंद भदौरिया: सहकारिता और लोकसेवा प्रबंधन
हरदीपसिंह डंग: नवकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण
जगदीश देवड़ा: वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना एवं सांख्यिकी
बिसाहूलाल सिंह: खाद्य व नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण
यशोधरा राजे: खेल, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास
सात में से चार राज्यमंत्री को स्वतंत्र प्रभार- इंदर सिंह परमार: स्कूल शिक्षा, रामकिशोर कांवरे: आयुष, रामखिलावन पटेल: ओबीसी कल्याण और घुमक्कड़, भारत सिंह कुशवाह: उद्यानिकी।

एक विभाग
भूपेंद्र सिंह: नगरीय प्रशासन
विजय शाह: वन
मीना सिंह: जनजातीय कार्य
कमल पटेल: कृषि
महेंद्र सिंह सिसौसिया: पंचायत एवं ग्रामीण विकास
प्रद्युम्र सिंह तोमर: ऊर्जा
मोहन यादव: उच्च शिक्षा
राजवर्धन सिंह: उद्योग

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