
फाल्गुन अमावस्या आज: जरूर आजमाएं ये 6 उपाय, मिलेगी सुख-समृद्धि!
भोपाल। फाल्गुन अमावस्या पर लोग व्रत रखते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन लोग अपने पूर्वजों का तर्पण या श्राद्ध भी करते हैं और कामना करते हैं कि परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहे।
हिंदू-कैलेंडर में फाल्गुन साल का अंतिम माह होता है। खास बात यह है इसी माह में रंगों का त्योहार होली आता है और इसी के बाद से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। फाल्गुन मास की अमावस्या का काफी धार्मिक महत्व है।
इसे लाभकारी और खुशियों भरा माना जाता है। माना जाता है कि फाल्गुन अमावस्या पर देवताओं का निवास संगम तट पर होता है। इस दिन प्रयाग संगम पर स्नान का भी अति महत्व होता है।
एक खास बात और बता दें कि फाल्गुन अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार या शनिवार को होती है तो लोगों के जीवन पर इसका असर सूर्य ग्रहण से भी ज्यादा सकारात्मक होता है।
इस बार बुधवार, 6 मार्च 2019 को फाल्गुन माह की अमावस्या है। पौराणिक शास्त्रों में महाशिवरात्रि के बाद आने वाली इस अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को बड़ी अमावस्या, स्नान दान अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। इस दिन नदी स्नान और तीर्थक्षेत्र में स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय किए जाते हैं।
अक्सर यह भी कहा जाता है कि पितृ दोष के लिए अमावस्या पर पूजा करने का विशेष महत्व है। लेकिन अमावस्या पर क्या किया जाए और कैसे किया जाए यह स्पष्ट रूप से कोई नहीं बताता।
विशेष अचूक उपाय:-
: हर अमावस्या पर दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए। पितृस्तोत्र या पितृसूक्त का पाठ करना चाहिए।
: अपने पितरों का ध्यान करते हुए प्रत्येक अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें और 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें। उसके बाद पितृसूक्त का पाठ करना शुभ फल प्रदान करता है।
: हर संक्रांति, अमावस्या और रविवार के दिन सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर 'ॐ पितृभ्य: नम:' का बीज मंत्र पढ़ते हुए 3 बार अर्घ्य दें।
: पितृ दोष में कमी शुभ फलों की प्राप्ति के लिए हर त्रयोदशी को नीलकंठ स्तोत्र का पाठ करना, पंचमी तिथि को सर्पसूक्त पाठ, पूर्णमासी के दिन श्रीनारायण कवच का पाठ करने के बाद ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिवंगत की पसंदीदा मिठाई और दक्षिणा सहित भोजन कराना चाहिए।
: शिवालय में जाकर भगवान शिव का इस दिन कच्चे दूध, दही से अभिषेक कर उन्हें काले तिले अर्पित करने का विशेष महत्व है।
: आपने सारे कष्ट दूर करने और जीवन में सबकुछ शुभ घटित होने के लिए इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के मंदिर पीले रंग की ध्वजा अर्पित करना चाहिए।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अमावस्या का दिन सुख-सौभाग्य और धन-संपत्ति, वैभव आदि की प्राप्ति के लिए विशेष मानी जाती है। अत: इस दिन उपरोक्त उपाय अवश्य किए जाने चाहिए, ताकि जीवन सुखमय व्यतीत हो।
फाल्गुन अमावस्या को क्या करें, क्या न करें...
: इस दिन सुबह गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। अमावस्या को शनि देव का दिन माना जाता है, इसलिए फाल्गुन अमावस्या के दिन शनि देव को नीले रंग का फूल जरूर चढ़ाएं। साथ ही काला तिल, काली उड़द दाल, सरसों का तेल, काजल और काला कपड़ा शनि मंदिर में चढ़ाएं।
- इस दिन गरीबों को दान करें, ऐसा करने से आपके पूर्वज खुश होंगे।
- फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान शिव, अग्नि देवता और ब्राह्मणों को उड़द दाल, दही और पूरी के रूप में नैवेद्यम जरूर अर्पण करें। इस प्रसाद को खुद भी खाएं, इससे आपका कल्याण होगा।
- शाम को पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीया जलाएं और सात चक्कर भी लगाएं। ऐसा करते समय अपने पूर्वजों को याद करें।
अमावस्या 2019: इस साल में कब-कब ...
: 05 जनवरी 2019- शनिवार- पौष अमावस्या
: 04 फरवरी 2019- सोमवार- माघ अमावस्या (मघा अमावस्या, मौनी अमावस्या, सोमवती अमावस्या, माघ अमावस्या)
: 06 मार्च 2019- बुधवार- फाल्गुन अमावस्या
: 05 अप्रैल 2019- शुक्रवार- चैत्र अमावस्या
: 04 मई 2019- शनिवार- वैशाख अमावस्या
: 03 जून 2019- सोमवार- ज्येष्ठ अमावस्या (शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, सोमवती अमावस्या)
: 02 जुलाई 2019- मंगलवार- आषाढ़ अमावस्या
: 01 अगस्त 2019- गुरुवार- श्रावण अमावस्या
: 30 अगस्त 2019- शुक्रवार- भाद्रपद अमावस्या (पिठोरी अमावस्या)
: 28 सितंबर 2019- शनिवार- आश्विन अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या)
: 28 अक्टूबर 2019- सोमवार- कार्तिक अमावस्या (दीपावली अमावस्या, सोमवती अमावस्या)
: 26 नवंबर 2019- मंगलवार- मार्गशीर्ष अमावस्या (दत्तात्रेय जयंती)
: 26 दिसंबर 2019- गुरुवार- पौष अमावस्या।
रहस्यमयी होती है अमावस्या, नकारात्मक शक्ति का रहता है प्रभाव...
हिन्दू-धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या और ग्रहण के रहस्य को उजागर किया गया है। इसके अलावा वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
उनमें से ही माह में पड़ने वाले 2 दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं-
पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। खासकर अमावस्या के प्रति ज्यादा डर है। वर्ष में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं। सभी का अलग-अलग महत्व है।
हिन्दू-पंचांग के अनुसार माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या।
अमावस्या : मान्यता के अनुसार वर्ष के मान से उत्तरायण में और माह के मान से शुक्ल पक्ष में देव आत्माएं सक्रिय रहती हैं तो दक्षिणायन और कृष्ण पक्ष में दैत्य आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं।
जब दानवी आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं, तब मनुष्यों में भी दानवी प्रवृत्ति का असर बढ़ जाता है इसीलिए उक्त दिनों के महत्वपूर्ण दिन में व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को धर्म की ओर मोड़ दिया जाता है।
कहा जाता है कि अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती हैं।
इस दिन चन्द्रमा नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है।
धर्मग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को 'अमा' कहा गया है। चन्द्रमंडल की 'अमा' नाम की महाकला है जिसमें चन्द्रमा की 16 कलाओं की शक्ति शामिल है। शास्त्रों में अमा के अनेक नाम आए हैं, जैसे अमावस्या, सूर्य-चन्द्र संगम, पंचदशी, अमावसी, अमावासी या अमामासी।
अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है, तब इसे 'कुहू अमावस्या' भी कहा जाता है। अमावस्या माह में एक बार ही आती है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं।
सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या आदि मुख्य अमावस्या होती है। अमावस्या के दिन क्या न करें...
- इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
- जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है।
Updated on:
06 Mar 2019 04:09 pm
Published on:
06 Mar 2019 04:08 pm
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