
भोपाल. शहर किनारे रिंग रोड को बजट की कमी के चलते रद्द किया था, अब सरकार की टीडीआर पॉलिसी से इसके निर्माण की उम्मीद बन रही है। ये रोड बनने से आधे शहर को ट्रैफिक और भीड़ के बीच गुजरने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी। इस पॉलिसी के तहत जमीन अधिग्रहण कर भूस्वामी को अतिरिक्त निर्माण करने का अधिकार पत्र दिया जाता है। इसे वह बेचकर राशि जुटा सकता है या फिर अपनी अन्य संपत्ति पर अतिरिक्त निर्माण से नुकसान की भरपाई कर सकता है।
मुबारकपुर से मिसरोद 11 मील तक 52 किमी लंबी रिंग रोड बनी हुई है, लेकिन मिसरोद के बाद कोलार और यहां से बैरागढ़ तक कोई बाहरी रास्ता नहीं है, जिससे लोग बिना शहर के बीच भीड़ से गुजरे पहुंच सके। इस हिस्से को पूरा करने शासन- प्रशासन की ओर से कई बार घोषणाएं हुई, लेकिन जमीन अधिग्रहण में अधिक राशि का अनुमान लगाकर योजना रद्द कर दी गई। अब फिर से इसका काम पूरा करने की कवायद की जा रही है। लोक निर्माण विभाग शासन की ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट
राइट्स यानी टीडीआर पॉलिसी से जमीन अधिग्रहण कर इसका निर्माण करने प्रस्ताव तैयार कर रहा है। फिलहाल ये प्राथमिक स्थिति में है। इस रोड के बनने से कोलार से बैरागढ़ की करीब चार लाख से अधिक आबादी की राह अब तक आसान हो जाएगी।
शहरवासियों को मिलेगी बड़ी राहत:
कोलार से बैरागढ़ के बीच करीब 25 किमी की दूरी है। कोलार से बैरागढ़ जाना हो तो रोशनपुरा, वीआईपी रोड या फिर पीरगेट से ही जाना पड़ता है। जबकि इसके लिए कोलार से नीलबड़ या रातीबड़ होते हुए बरखेड़ी और आगे बैरागढ़ के पास से रास्ता निकाला जा सकता है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रिंग रोड के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का कहा था, लेकिन बाद में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा अधिक आकलित होने से प्रोजेक्ट रद्द हो गया। यदि भोपाल की अधूरी रिंग रोड को पूरा करने प्रस्ताव तय किया जाता है और इसे प्राथमिकता में शामिल कर पूरा कराया जाता है तो शहरवासियों को बड़ी राहत मिल सकती है। अभी बैरागढ़ के पास नरसिंहगढ़ रोड से करोद कोकता बायपास होते हुए पटेल नगर, मिसरोद 11 मील तक रोड बनी हुई है।
ये होगा फायदा
कोलार रोड से ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। नीलबड़, रातीबड़ और बैरागढ़ की ओर आवाजाही करने वाले सीधे रिंग रोड से होकर गुजर जाएंगे। अभी भदभदा से नीलबड़ और आगे तक रोड बनाई जा रही है। हालांकि ये शहर के अंदर की रोड है, ऐसे में नीलबड़ व रातीबड़ के बीच ये रिंग रोड निकल सकती है। रोजाना करीब 30 हजार लोगों को लाभ हो सकता है।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद के मुताबिक रिंग रोड का काम पूरा किया जाना चाहिए। रिंग रोड बनने के बाद शहर का विकास बेहतर हुआ। कोकता तक आवाजाही आसान हुई, साथ ही आदमपुर से लेकर नरसिंगढ़ रोड तक विकास कार्य हो सके। शहर के बीच से मैकेनिकल मार्केट और इसी तरह के बड़े बाजार व व्यवसायिक केंद्रों को शहर से बाहर बेहतर एप्रोच रोड के साथ करने का रास्ता भी खुला है।
Published on:
08 Dec 2022 09:49 am
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