
पूर्व मंत्री और विधायक आरिफ अकील की तबियत बिगड़ी, मेदांता अस्पताल किया गया एयरलिफ्ट
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की उत्तर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री आरिफ अकील को अचानक दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया है। विधायक आरिफ अकील को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि, भोपाल के डॉक्टरों ने विधायक अकील के हार्ट में ब्लॉकेज बताए हैं, जिसके चलते मेदांता में उनका ऑपरेशन किया जाएगा।
बता दें कि, विधायक आरिफ अकील पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे हैं। यही कारण है कि, हमेशा प्रदेश की राजनीति में सक्रीय बने रहने वाले कांग्रेस नेता बीते कुछ सालों से एक्टिव नहीं दिख रहे हैं।
भोपाल के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे विधायक
बताया जा रहा है कि, आरिफ अकील बीते 4 दिनों से भोपाल के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। यहां उनके उपचार में जुटे डॉक्टरों का कहना है कि, उनके हार्ट में ब्लॉकेज हैं, जिसका ऑपरेशन होना जरूरी है। इसलिए उन्हें तत्काल फैसला लेते हुए गुड़गांव के मेदांता अस्पताल ले जाया गया है। वहां उनका ऑपरेशन किया जाएगा।
कांग्रेस का अभेद किला हैं आरिफ अकील
भोपाल उत्तर विधानसभा से कांग्रेस के विधायक आरिफ अकील को भोपाल की राजनीति में दिग्गज नेता कहा जाता है। इस क्षेत्र में आरिफ अकील के बूते पर ही पिछले 25 सालों से कांग्रेस को हिलाने में भाजपा ने ऐड़ी चोंटी का जोर लगा लिया है, लेकिन अबतक सफलता नहीं मिली है। साल 1998 से लगातार आरिफ अकील ही इस सीट से विधायक चुनते आ रहे हैं। खास बात ये है कि, भाजपा ने इस सीट पर उन्हें हराने के लिए कभी हिंदू तो कभी मुस्लिम प्रत्याशी तक सामने उतारे हैं। लेकिन, अबतक वो कांग्रेस के इस अभेद किले को नहीं तोड़ सकी।
1998 से अबतक आरिफ अकील विधायक
ऐसा नहीं है कि, भोपाल उत्तर विधानसभा शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ रही हो, यहां से दो बार बीजेपी नेता भी विधायक रह चुके हैं। साल 1977 में पहली बार उत्तर विधानसभा सीट गठित हुई थी। इसके बाद हुए चुनाव में पहली बार साल 1977 में यहां से हामिद कुरैशी जनता पार्टी की ओर से विधायक बने थे। जबकि, साल 1993 में रमेश शर्मा बीजेपी से विधायक बने। वहीं, 1998 से लगातार अबतक आरिफ अकील ही इस सीट से विधायक चुनते आ रहे हैं।
निर्दलीय चुने गए थे पहली बार अकील
बता दें भोपाल उत्तर विधानसभा में पहली बार साल 1977 में चुने हुए थे, जब हामिद कुरैशी जनता पार्टी से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 1980 में रसूल अहमद सिद्दीकी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) से विधायक बने। 1990 में आरिफ अकील पहली बार उत्तर विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए। साल 1993 में बीजेपी के रमेश शर्मा ने अकील को हरा दिया। लेकिन, इसके बाद से मानो उत्तर विधानसभासीट आरिफ अकील का गढ़ ही बन गई। साल 1998 से लेकर 2018 तक के चुनाव में इस सीट पर अकील का दबदबा ही कायम है।
पिछली बार भी लंबी लीड से की थी जीत दर्ज
साल 2018 में कांग्रेस नेता आरिफ अकील को 90 हजार 403 मत प्राप्त हुए थे, जबकि बीजेपी की फातिमा रसूल सिद्दीकी 55 हजार 546 वोट मिले थे। इन दोनों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी शुभम आर्य को 4 हजार 491 वोट ही मिल सके थे।
क्या होंगे 2023 के समीकरण ?
बीमार रहने के कारण विधायक आरिफ अकील अपने क्षेत्र में पूरे दमखम के साथ सक्रीय नहीं रह पाते। फिलहाल, उनके बेटे आतिफ अकील पिता की तबियत ठीक न रहने के कारण अपने क्षेत्र के कार्यों में सक्रीयता रखते हैं। ऐसे में अब चर्चा ये भी है कि, 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी आरिफ अकील के बेटे आतिफ को ही चुनावी मैदान में उतार सकती है। जबकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, भाजपा की ओर से पूर्व महापौर आलोक शर्मा, पूर्व पार्षद पंकज चौकसे, महेश मकवाना, मनोज राठौर और चेतन भार्गव को इस सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है
Published on:
26 Jun 2023 08:25 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
