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सदन में जिस विधेयक पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, अब सुझाव देने आगे नहीं आ रहे विधायक

एक माह में विधानसभा सचिवालय तक पहुंचे मात्र 6 सुझाव

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भोपाल। जुलाई 2019 में पेश किए गए जिस विधेयक पर विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरा था, अब उसी विधेयक पर सुझाव देने के लिए कोई भी विधायक आगे नहीं आ रहा है। विधानसभा द्वारा गठित प्रवर समिति ने एक माह पहले आमजन से सुझाव मांगे थे, लेकिन अभी तक मात्र छह सुझाव विधानसभा सचिवालय तक पहुंचे हैं। अब समिति लोगों के पास पहुंचकर सुझाव ले रही है।

मामला गौ वंश प्रतिषेध विधेयक का है। राज्य सरकार ने छह माह पहले सदन में यह संशोधन विधेयक पेश किया था। मुख्य विपक्षी दल भाजपा के इस विधेयक के संशोधनों पर एतराज को देखते हुए स्पीकर ने इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपा। कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति ने गौ पालकों, गौ सेवकों सहित इस विषय में रुचि रखने वाले व्यक्ति, विषय विशेषज्ञ, संस्थाएं सहित आमजन से सुझाव मांगे लेकिन इस मामले में न तो सदस्य और न ही संस्थाएं आगे आ रहीं हैं।

यह थी भाजपा विधायकों को आपत्ति -

भाजपा विधायकों को इस बात पर आपत्ति रही कि संशोधन विधेयक में गौ वंश परिवहन करने वालों को रोकना प्रतिबंधित होने से इसका परिवहन करने वाले बेखौफ हो जाएंगे। सजा के प्रावधान पर भी विपक्ष को एतराज है क्योंकि गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वाले लोगों को मध्य प्रदेश में 6 महीने से लेकर 5 साल तक के सख्त कारावास की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा इन लोगों पर 25 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक का आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि अपराधी दोबारा ऐसा अपराध करता है तो उसकी सजा दोगुनी कर दी जाएगी।

प्रवर समिति अभी और लेगी सुझाव -

प्रवर समिति ने रविवार को इंदौर पहुंचकर गौ शाला संचालक, गौ पालकों, गौ सेवकों सहित अन्य लोगों से सुझाव लिए। यहां 26 सुझाव समिति को मिले। अब समिति प्रदेश के अन्य जिलों में पहुंचकर आमजन के सुझाव लेगी।

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गौ वंश प्रतिषेध संशोधन विधेयक पर सुझाव लेने के लिए प्रवर समिति का गठन तो कर दिया गया लेकिन सुझाव इत्यादि के लिए विधायकों को इसकी सूचना सचिवालय के माध्यम से नहीं दिए जाने के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि विधायकों ने सदन में अपने सुझाव दिए थे। प्रवर समिति की सूचना मिलती तो विधायक यहां भी सुझाव देते।
- गोपाल भार्गव, नेता प्रतिपक्ष मप्र विधानसभा