
Mobile Addiction
स्क्रीन पर एकटक देखने से आंखों का ब्लिकिंग रेट कम हो रहा है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अब डोर टू डोर अभियान चलाएगा। देश के किसी भी राज्य में इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए पहली बार अभियान चलेगा।
खानपान में बदलाव से समस्या
एनएचएम की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हिमानी यादव के अनुसार पहले मोतियाबिंद की समस्या सिर्फ बुजुर्गों या ऐसे बच्चों में ही देखने को मिलती थी जिन्हें जन्मजात समस्या होती थी, लेकिन खानपान में बदलाव के चलते अब कम उम्र में ही बच्चों को इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
अप्रेल-21 से मार्च-22 तक जन्मजात मोतियाबिंद के 234, रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्योरिटी के 89 और विजन इंपेअरमेंट के 78 केस आए तो अप्रेल-22 से मार्च-23 तक जन्मजात मोतियाबिंद के 491, रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्योरिटी के 59 और विजन इंपेअरमेंट के 71 केस मिले।
ज्यादा देर मोबाइल पर पढ़ना नुकसानदायक
स्मार्टफोन की लत से बचने लोग डिजिटल डिटॉक्स अपना रहे हैं। यह सही विकल्प नहीं है। जरूरी है कि जो काम बिना फोन के संभव हैं उनके लिए फोन का उपयोग न करें। कई लोग फोन पर न्यूजपेपर, बुक्स, आर्टिकल घंटों पढ़ते हैं। आंखों को नुकसान होने का खतरा रहता है। बुजुर्गों को खास ध्यान देना चाहिए। -डॉ. एसएस कुबरे, नेत्र विशेषज्ञ, हमीदिया अस्पताल भोपाल
2.5%तक बढ़ रहे केस
सामान्य तौर पर आंखों का ब्लिकिंग रेट 15 से 16 है लेकिन स्क्रीन पर लगातार बने रहने से ब्लिकिंग रेट 6 से 7 तक पहुंच जाता है। विजन भी कमजोर हो जाता है।
Published on:
20 Jul 2023 01:23 pm
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