
Jaipur metro
मेट्रो पर ५० करोड़ से ज्यादा फूंकने के बाद अब मोनो रेल की प्लानिंग पर खर्च होगी जनता की गाढ़ी कमाई फिजिबिलटी और वायबिलटी सर्वे के लिए प्रायवेट कंसलटेंट नियुक्त करेगी सरकार मेट्रो प्रोजेक्ट के सात रूट की प्लानिंग तय करने के बाद अब नए सिरे से कवायद सरकार केवल पहले फेज के दो रूट पर मेट्रो चलाने के विचार में, बाकी के लिए मोनो पर विचार भोपाल। पिछले ९ साल से मेट्रो रेल को जमीन पर उतारने की कवायद पर ५० करोड़ रुपए से ज्यादा राशि फूंकने और सात रूट के लिए जगह तय करने के बाद सरकार अब मोनो रेल की प्लानिंग पर जनता की गाढ़ी कमाई खर्च करेगी।
सीएम ने साफ किया है कि भोपाल और इंदौर में पहले फेज के रूट पर पहले से प्रस्तावित मेट्रो रेल चलाई जाएगी लेकिन सरकार आगे के फेज में मोनो रेल चलाने का फैसला कर सकती है। ये फैसला मोनो रेल की फिजिबिलटी � ��र वायबिलटी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। मोनो रेल के लिए किए जाने वाले ये सर्वे इससे पहले मेट्रो रेल के लिए हुए थे जिन पर ५० करोड़ रुपए से ज्यादा राशि खर्च हो चुकी है। मोनो रेल पर दोबारा ये खर्च सरकार उठाने तैयार है जबकि मोनो रेल का संचालन अगले फेज में करने पर अभी सरकार केवल विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि पहले फेज में रूट नंबर २ और ५ शामिल हैं जिन्हें टुकड़ों में पूरा करने मे ं अभी १० वर्ष का वक्त लगने का अनुमान है।
मोनो रेल पर वर्तमान में होने वाले सर्वे पर जनता की गाढ़ी कमाई खर्च करने के बाद ये रिपोर्ट वर्षों बाद कितने काम की बचेंगी, इस पर भी जानकार सवाल उठा रहे हैं। मेट्रो पर कहां कितना खर्च मेट्रो रेल की डीपीआर बनाने के लिए मुंबई की गुप्ता एसोसिएट्स और जर्मन बेस्ड कंपनी का चयन हुआ था। डीपीआर पर अलग अलग चरणों में वर्ष २०१२ के बाद अब तक ५५ करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। एक अन्य पॉलिसी भी बनवाई गई थी जिसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट का नाम दिया गया। इस काम के लिए इंदौर बेस्ड मेहता एसोसिएट्स का चयन किया गया।
पिछले १.५ साल के दौरान इस कंपनी के मालिक हितेश मेहता को टैक ्स मिलाकर करीब १ करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष २०१४ से अब तक जारी टेंडर और डॉक्यमेंटेशन पर लगभग ८८ लाख खर्च हो चुके हैं। अभी क्या है प्रोजेक्ट का स्टेटस पहले फेज में भदभदा से रत्नागिरी तक १२.३४ किमी और करोंद से एम्स तक १४.३ किमी लंबा रूट तैयार किया जाएगा। करोंद से एम्स के बीच १६ जबकि भदभदा से रत्नागिरी के बीच १४ स्टेशन बनेंगे। पहले फेज की लागत ६९६२.९२ करोड़ रुपए आंकी गई है। मेट्रो कंपनी ने अभी एम्स से सुभाष नगर तक ६.३२ किमी के रूट पर सिविल कंस्ट्रक्शन करने के लिए २४८ करोड़ रुपए का टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी किया है।
फैक्ट फाइल
इन कामों पर करोड़ों फूंके डीपीआर डिजाइनिंग- अब तक ५५ करोड़ रुपए खर्च मुंबई बेस्ड कंपनी का बकाया- ३२ करोड़ रुपए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट- १ करोड़ टेंडर डॉक्यूमेंट, लीगल कंसलटेंसी- ८८ लाख रुपए ये हैं भोपाल के प्रस्तावित रूट रूट नंबर-स्टेशन-दूरी (किमी)-समय (मिनट) १-बेरागढ़-अवधपुरी-२०.६७-४२.७६ २-करोंद-एम्स-१४.३-२८.२२ ३-भौंरी-बसंत कुंज-२१.६४-३९.९५ ४-एयरपोर्ट-बसंत कुंज-१८.५६-३६.३९ ५-अशोक गार्डन-मदर टेरेसा स्कूल-१९.०५-३४.३२ ६-भदभदा-रत्नागिरी भेल-१२.३४-२३.८० ७-मंडीदीप-हबीबगंज-१५.६-२३.२८
मोनो रेल को लेकर सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद फैसला लेगी। पहले चरण के लिए प्रस्तावित योजना में कोई बदलाव नहीं होगा। जयवर्धन सिंह, मंत्री, नगरीय प्रशासन एवं आवास
शहर को न मेट्रो की जरूरत है न मोनो रेल की। सरकार को ये समझना होगा कि कॉमन मैन की जरूरत क्या है। इतने महंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सरकार और जनता दोनों अफोर्ड नहीं कर पाएगी। राजेंद्र कोठारी, अर्बन डेवलपमेंट एक्सपर्ट
Published on:
18 Jan 2019 01:45 pm
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