
मां-पापा करते हैं कुक का काम बेटे ने फेंसिंग में जीता गोल्ड
भोपाल. माता-पिता एक बंगले में कुक का काम करते हैं। बेटे को खेलने भेजने के लिए दिन रात मेहनत में जुटे रहते हैं। लेकिन आज उनके बेटे ने देश को सोना दिलाया है। हम बात कर रहे हैं मप्र राज्य तलवारबाजी अकादमी के युवा खिलाड़ी शंकर पांडे की। उन्होंने इंग्लैंड के न्यूकैसल में खेली गई इंटरनेशनल जूनियर कॉमनवेल्थ तीरंदाजी चैंपियनशिप में मंगलवार को भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल जीता है। चैम्पियनशिप के ईपी टीम इवेन्ट में उन्होंने आर्मी के भूपेन्द्र सिंह, बिबिश के. और महाराष्ट्र के गिरीश जकाते के साथ मिलकर यह कारनामा किया। इस टीम ने फाइनल मुकाबले में वेल्स को उसी के घर में 45-33 से शिकस्त देकर देश को स्वर्ण पदक दिलाया।
पांच साल पहले थामी थी तलवार
15 वर्षीय इस खिलाड़ी ने पांच साल पहले 2013 में तलवारबाजी शुरू की थी, जब ये अपने दोस्तों के साथ स्टेडियम में घूमने आए थे। तभी शंकर ने यहां खिलाडिय़ों को तलवारबाजी करते देखा। फिर घर में पिता से बोलकर अकादमी ज्वॉइन करने की जिद की। बेटे की इस जिद और जुनून को पिता बना नहीं कर पाए और अकादमी में प्रवेश दिलवाया।
आर्थिक तंगी से जुझता है परिवार
शंकर के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं। मां गीता पांडे और पिता लक्ष्मण पांडे के न्यू मार्केट स्थित 45 बंगलों में घर-घर जाकर खाना बनाते हैं। वे कहते हैं कि कई बार हम बेटे को बाहर खेलने जाने के लिए पैसे भी नहीं दे पाते हैं। हमारा सपना है कि बेटा ओलंपिक में खेलकर देश के लिए पदक लेकर आए।
हाथ में आए थे पांच टांके
पिता लक्ष्मण पांडे ने बताया कि शंकर की खेल की शुरुआत खराब रही थी, जब इसने तलवारबाजी शुरू कि थी एक साल बाद उसके बाएं हाथ में चोंट आ गई थी। पांच टांके लगे थे। डॉक्टर ने खेलने को मना कर दिया था। शंकर ने फिर भी हार नहीं मानी और ठीक होने के बाद अकादमी ज्वॉइन की। इस खिलाड़ी ने अभी तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तीन रजत और पांच कांस्य पदक अर्जित किए हैं।
पहला इंटरनेशनल मेडल जीता
कोच भूपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शंकर का यह पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है और वो भी गोल्ड। इससे पहले इसने मार्च 2018 में दुबई में खेली गई एशियन जूनियर और कैडेट चैंपियनशिप में इंडिया की ओर से भागीदारी की थी।
Published on:
01 Aug 2018 05:20 pm
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