
शशांक अवस्थी, भोपाल. भोपाल देश का ऐसा पहला शहर होगा जहां एक नहीं चार-चार मदर मिल्क बैंक होंगे। जेपी के बाद अब एम्स, हमीदिया व काटजू अस्पताल में इसी साल मदर मिल्क बैंक की शुरुआत होने जा रही है। खास यह है कि यहां मां के दूध को छह माह तक ताजा रखा जा सकेगा। इन मिल्क बैंकों में माताएं अपना दूध भी दान कर सकेंगी।
भोपाल के एम्स अस्पताल में जल्द ही ह्यूमन मिल्क बैंक की शुरुआत होगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत भोपाल व इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने की योजना बनी थी। लेकिन जेपी में ही इसकी शुरुआत हो सकी। मिल्क बैंक में पाश्चराइजेशन यूनिट, रफ्रिजरेटर, डीप फ्रीज, आरो प्लांट जैसे संसाधनों के जरिए छह महीने तक मां का दूध को सुरक्षित रहेगा।
मिल्क बैंक में अपना दूध दान कर सकेंगी महिलाएं
एम्स के डायरेक्टर डॉ.अजय सिंह के अनुसार एम्स में मरीजों की सुविधाओं के लिए लगातार मशीनों व दवाईयों की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां अत्याधुनिक सुविधाएं व संसाधनों में इजाफा किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब मदर मिल्क बैंक स्थापित किया जा रहा है।
क्या है मदर मिल्क बैंक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानव दूध बैंक उन शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण है। मानव दूध शिशु मां के दूध के बाद सबसे बेहतर आहार है। मां के दूध में शिशुओं के लिए जरूरी पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं। शिशुओं को कम से कम छह महीने तक स्तनपान कराया जाना चाहिए।
व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण स्तन दूध के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं देते। फिर भी बेंगलुरु स्थित एक कंपनी कथित तौर पर 4,500 रुपए में 300 मिलीलीटर फ्रोजन ब्रेस्ट मिल्क बेचती है।
एनएचएम के शिशु स्वास्थ्य शाखा उपसंचालक डॉ. हिमानी यादव बताती हैं कि ह्यूमन मिल्क बैंक ऐसे अस्पताल में खुलता है जहां हर साल कम से कम10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हो। इसके लिए विधिवत ट्रेनिंग भी जरूरी है।
यह है नियम
2017 में देश में स्तनपान प्रबंधन केंद्रों की स्थापना के निर्देश जारी हुए थे। जिले स्तर पर दूध बैंक स्थापित करना अनिवार्य था। इसके लिए निजी संस्था ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया (बीपीएनआई) भी काम कर रही है। देश में अभी करीब 100 मानव मिल्क बैंक हैं।
क्यों है जरूरत
भारत में एक साल में पैदा हुए 2.7 करोड़ बच्चों में से 75 लाख का जन्म के समय कम वजन होता है। 35 लाख बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं। नीकू वार्ड में लगभग 30-50 प्रतिशत शिशुओं और विशेष नवजात देखभाल यूनिट में 10-15 प्रतिशत शिशुओं को दान में मिलने वाले मानव दूध की आवश्यकता होती है। समय से पहले जन्मे बच्चे को प्रतिदिन 30 मिलीलीटर दूध की आवश्यकता होती है जबकि एक स्वस्थ बच्चे को 150 मिलीलीटर तक दूध की आवश्यकता होती है।
Published on:
08 Feb 2023 12:18 pm

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