
गर्मी में बारिश से तेंदूपत्ता पर माता का प्रकोप
सागर. मौसम की मार इस बार तेंदूपत्ता मजदूरों की आय पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है। तेज गर्मी के बीच पिछले दिनों रह- रहकर हो रही बारिश से तेंदूपत्ता माता रोग की चपेट में आया है। नमी रहने से पत्ता लाल लहरिया हो गया है और उस पर कीटों का भी प्रकोप नजर आ रहा है। मजदूरों को इस रोग के कारण पत्तियों का संग्रहण करने में काफी मुश्किल हो रही है। हालांकि अभी वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ते की तुड़ाई और संग्रहण का कार्य अधिकृत रूप से शुरू नहीं कराया गया है, लेकिन अंचल में तेंदूपत्ता मजदूर जंगल से पत्ते तोडकऱ जमा करने में लग गए हैं। जिले के उत्तर और दक्षिण वन मंडलों में 40 से ज्यादा वन समितियों के माध्यम से तेंदूपत्ता की तुड़ाई और खरीदी का कार्य कराया जाता है। प्रतिवर्ष होने वाले इस कार्य में जिले में अंचल में 30 हजार से ज्यादा मजदूर सीधे तौर पर जुड़े हैं। ये मजदूर गर्मियों के दिनों में जंगलों से तेंदूपत्ता तोड़ते हैं और उसे वन समितियों के फड़ पर जमा कराते हैं। इसके बदले में उन्हें प्रति मानक बोरा तीन हजार रुपए मिलते हैं।
साथ ही तेंदू पत्ता की नीलामी से वन विभाग को होने वाले मुनाफे का अंश इन मजदूरों को बोनस के रूप में दिया जाता है। गर्मियों के दो- ढाई महीनों में जंगलों से सटे गांवों के मजदूर शहरों में जाना बंद कर इस काम में लग जाते हैं। दक्षिण वन मंडल में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए विभाग द्वारा 7 परिक्षेत्रों की कुल 23 समितियों में से 12 का निर्धारण कर लिया गया है, जबकि शेष के लिए अभी संग्राहकों की भूमिका तय की जाना शेष है। रह- रहकर हो रही बरसात के कारण तेंदूपत्ता तुड़ाई और संग्रहण का काम इस बार विभाग द्वारा अभी शुरू नहीं कराया गया है। गर्मियों में मौसम में होने वाली तेंदूपत्ता तुड़ाई के दौरान अकेले दक्षिण वन मंडल से ही 18600 मानक बोरा पत्ता इक_ा किया जाता है। वहीं उत्तर वन मंडल को मिलाकर यह मात्रा 40 हजार तक पहुंच
जाती है।
Published on:
10 May 2023 12:23 pm

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
