
MP Board Commits Major Blunder Involving 15000 Students (Photo Source- Patrika)
MP Board- माध्यमिक शिक्षा मंडल यानि एमपी बोर्ड ने प्रदेश के हजारों स्टूडेंट के साथ बड़ी गड़बड़ी की है। बोर्ड की 10वीं-12वीं की डिजिटल अंकसूची से यह खुलासा हुआ है। माशिमं ने प्रदेश के हजारों रेगूलर विद्यार्थियों को प्राइवेट बना दिया। बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए प्रदेशभर के विद्यार्थियों के साथ यह गड़बड़ी सामने आई है। पूरे साल छात्रों ने नियमित कक्षाएं लीं। रेगुलर छात्र का शुल्क जमा किया लेकिन जब मार्कशीट मिली तो वे प्राइवेट बन गए। ऐसे एक-दो नहीं, प्रदेशभर में 15 हजार छात्र हैं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने अपने रिकार्ड में स्वाध्यायी कर दिया। इससे प्रतियोगी परीक्षा में शामिल विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। वे सुधार के लिए मंडल के चक्कर के काट रहे हैं।
माशिमं की 10वीं और 12वीं परीक्षा में इस बार प्रदेशभर के 16 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। 11 फरवरी से शुरू हुई इन परीक्षाओं के नतीजे 15 अप्रेल को जारी हुए। 12वीं का रिजल्ट 76.01 फीसदी तो 10वीं में 73.42 फीसदी आया है। मंडल ने परीक्षार्थियों के लिए डिजिटल अंकसूची जारी की है। इसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई।
प्राइवेट स्कूलों में नियमित दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों की अंकसूचियों पर प्राइवेट प्रिंट हो गया है। दरअसल मंडल ने मान्यता वाले स्कूलों को गैर मान्यता मानकर विद्यार्थियों को प्राइवेट कर दिया। इससे विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो सकता है। स्कूल संचालकों ने मंडल से इसकी शिकायत की है।संचालकों के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मान्यता लेकर आए थे लेकिन मंडल ने अनदेखी की।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि 10वीं-12वीं के बच्चों के भविष्य से यह खिलवाड़ है। यह सरासर माध्यमिक शिक्षा मंडल की गलती है। स्टूडेंट की अंकसूचियों में सुधार के लिए अफसरों से मिल रहे हैं।
मामला निजी स्कूलों से जुड़ा है। इनकी मान्यता लोक शिक्षण संचालनालय ने समाप्त कर दी थी। इसके खिलाफ स्कूल संचालक हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने अस्थाई मान्यता देने के निर्देश दिए। इस आधार पर डीपीआई ने मान्यता दे दी। मंडल को भी सूचना दी। रिजल्ट बनाने में इसकी अनदेखी हुई। मंडल के अधिकारियों ने मान्यता प्राप्त स्कूलों निजी स्कूलों को भी गैर मान्यता बताकर वहां के स्टूडेंट को प्राइवेट बता दिया है।
इधर माशिमं ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। बोर्ड के सचिव बुद्धेश वैद्य के मुताबिक अंकसूचियों में गलती के मामले सामने आए हैं। इनमें सुधार करा रहे हैं। अभी विद्यार्थियों को डिजिटल अंकसूची मिली है। मूल अंकसूची नहीं बनी है। उसे सुधरवाया जाएगा।
Updated on:
23 Apr 2026 08:47 am
Published on:
23 Apr 2026 08:47 am
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