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रक्तदान को बढ़ावा देने 7 हजार डॉक्टरों की तैयार होगी ‘रक्त कुंडली’

- कोविड के दौरान प्लाज्मा की जरूरत पड़ी तो जीएमसी के जूडा विंग ने बनाया ग्रुप, डेटा बेस और पोर्टल होगा लॉन्च - रक्तदान को बढ़ावा देने छेड़ा आंदोलन - लक्ष्य मरीजों को बचाने के साथ जागरुकता बढ़ाना

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भोपाल@प्रवीण श्रीवास्तव

कोरोना के दौरान संक्रमण से बचाने जब प्लाज्मा की भूमिका को अहम माना गया तब मांग इतनी बढ़ी कि अस्पतालों में प्लाज्मा की कमी हो गई। ऐसे में गांधी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स की यूजी विंग ने हेल्पलाइन बनाकर प्लाज्मा ग्रुप बनाया और तीन हजार जूनियर डॉक्टर्स को इससे जोड़ा। यही यूजी विंग मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर्स और स्टाफ की रक्तकुंडली तैयार कर रही है।

इसके लिए सभी 19 सरकारी मेडिकल कॉलेज को यूजी विंग के साथ जूनियर्स डॉक्टर और अन्य स्टाफ का ब्लड डेटा बेस तैयार किया जा रहा है। मप्र के करीब सात हजार डॉक्टर्स के अलावा अन्य लोगों के ब्लड ग्रुप और उनकी पूरी जानकारी होगी। इस रक्तकुंडली को मंगलवार को लॉन्च किया जाएगा।

ऐसे करेंगे काम: यूजी विंग के पूर्व अध्यक्ष और इस प्रोग्राम के चीफ एडवाइजर डॉ. आकाश सोनी के मुताबिक इसके लिए पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें वाट्सऐप नंबर जारी किया जाएगा।

इस नंबर पर हम डोनर की रक्त संबंधी जानकारी के साथ अन्य जानकारी मसलन घर का पता, बीमारी इत्यादि की जानकारी भी अपलोड करेंगे। हमारे पास फिलहाल सात हजार लोगों की जानकारी है, जिन्हें जोड़ा जाना है। ऐसे में प्रदेश के जिस क्षेत्र में मरीज को जरूरत होगी, उसके पास वाले डोनर को भेज देंगे।

इन नंबरों से ले सकते हैं जानकारी:
नीरज सोनी 8440920905, सुश्रित पांडे 8982831465, राघवेन्द्र शर्मा 8839945429, स्वरित शर्मा 9131076408

यह होगा फायदा
: हजारों डोनर एक प्लेटफार्म पर होंगे, जिससे पता होगा कि कहां कौन रक्तदान कर सकता है।

: मरीजों को रक्त के बदले में डोनर ले जाने की बाध्यता कम होगी, ग्रुप के सदस्य ही काम करेंगे ।

: मरीज और डोनर के मन में उठने वाली शंकाओं को दूर करने के लिए काउंसलिंग भी होगी।

मंगलवार को लॉचिंग की वजह!
बताया जा रहा है इस साल चूंकि विश्व रक्तदाता दिवस मंगलवार, 14 जून को है, अत: ऐसे में इसी दिन को उचित मानते हुए डेटा बेस और पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। जिसके माध्यम से मरीजों को रक्त के बदले में डोनर ले जाने की बाध्यता कम होगी, ग्रुप के सदस्य ही काम करेंगे। साथ ही इसकी मदद से मरीज और डोनर के मन में उठने वाली शंकाओं को दूर करने के लिए काउंसलिंग भी होगी।

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