19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मरीजों के साथ ऐसी लापरवाहीः कान में झांककर फिट कर देते हैं मशीन

भोपाल शहर में ये नीम हकीम और कोई नहीं, बल्कि हियरिंग एड (कान की मशीन) की दुकानों के कर्मचारी हैं। कान की समस्याओं को दूर करने वाली मशीन लगाने से पहले दिग्गज डॉक्टर तक कई जांच करते हैं।

2 min read
Google source verification

image

Manish Geete

Aug 26, 2016

Hearing Aids

Hearing Aids


भोपाल. 'नीम हकीम खतरा-ए-जान'। भोपाल शहर में ये नीम हकीम और कोई नहीं, बल्कि हियरिंग एड (कान की मशीन) की दुकानों के कर्मचारी हैं। कान की समस्याओं को दूर करने वाली मशीन लगाने से पहले दिग्गज डॉक्टर तक कई जांच करते हैं। मगर हियरिंग एड कर्मचारी हैं कि सिर्फ मरीज के कान में झांककर ही मर्ज का पता लगा लेते हैं। इसी तुक्के आधार पर कान की मशीन भी थमा देते हैं।

नतीजतन दिक्कतें कम होने की बजाय और बढ़ जाती है। कान की मशीन लगाने से पहले ऑडियोमेट्री टेस्ट का सहारा लिया जाना ही सही तरीका है।

जेपी अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अशोक बाठिया भी बताते हैं कि ऑडियोमेट्री मशीन से पता लगाया जाता है कि कान किस स्तर तक लॉस हुआ है। इसी आधार पर कान को फ्रिक्वेंसी नंबर दिए और इन्ही नंबरों के आधार पर मशीनें ली जानी चाहिए। बिना डॉक्टरी सलाह के मशीन लगाने से समस्याएं बढ़ सकती हैं।

Hearing Aids

ऐसे बरकरार रखें सुनने की क्षमता
-पैदा होते ही बच्चे के कानों का टेस्ट कराएं। 45 साल की उम्र के बाद कानों का चेकअप कराते रहें।
-शोरगुल वाली जगह पर कानों के लिए ईयर प्लग लगा सकते हैं।
-60/60 का नियम फॉलो कर सकते हैं। इसमें आईपॉड को 60 मिनट के लिए उसके मैक्सिमम वॉल्यूम के 60 फीसदी पर सुनें और फिर 60 मिनट का ब्रेक लें।


हियरिंग एड मोटे तौर पर दो तरह के
एनालॉग: इन हियरिंग एड को काफी समय पहले इस्तेमाल किया जाता था। ये गैरजरूरी साउंड को कंट्रोल नहीं कर पाते, जिससे असली आवाज सुनने में दिक्कत होती है।

डिजिटल: ये पूरी तरह प्रोग्राम्ड होते हैं और गैरजरूरी आवाज को कंट्रोल कर लेते हैं। आवाज ज्यादा साफ सुनाई देती है। इन्हें मोबाइल, टीवी और रिमोट कंट्रोल के साथ सिंक किया जा सकता है।

आकार के हिसाब से हियरिंग एड चार प्रकार के है: पॉकेट मॉडल, कान के पीछे लगाए जाने वाले, कान के अंदर लगाए जाने वाले और चश्मे के साथ लगाए जाने वाले।

दुकानों के कर्मचारी जो मशीन देते हैं वो सिर्फ एम्पलीफायर होते हैं जो आवाज को एकत्रित करते हैं। यह मशीनें बाहर से आने वाली मशीनों को कंट्रोल नहीं कर सकती लिहाजा कानों के लिए खासे नुकसान दायक होते हैं।
डॉ. एसपी दुबे, ईएनटी विशेषज्ञ

ये भी पढ़ें

image