
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का एमपी नगर व्यावसायिक केंद्र के साथ ही एजुकेशन हब बन चुका है। यहां हजारों महिलाओं और युवतियों की आवाजाही रहती है। थाने में भी महज 55 लोगों का स्टॉफ। अकेले कोचिंग की बात करें तो लगभग 100 इंस्टीट्यूट्स में रोजाना एक लाख स्टूडेंट्स आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल हैं।
पिछले दो साल में यहां छेड़छाड़ के 28 मामले दर्ज हुए। इससे पहले छात्राओं पर गोली चलाने और अपहरण तक के मामले सामने आए। अपराध बढ़ते गए। पुलिस बल और सुरक्षा नहीं। 'पत्रिका' ने गुरुवार को एमपी नगर का जायजा लिया। पूरे क्षेत्र में पुलिस का कोई जवान गश्त करते नहीं मिला।
इनसे भी बिगड़ा माहौल
एमपी नगर जोन-2 में हर 10 कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग के बीच एक बियर बॉर खुला मिला। वहीं, तीन शराब दुकान के साथ, सात हुक्का बार खुले हुए हैं। गौरतलब है कि पुलिस खुद मानती है कि अधिकतर अपराध की वजह नशा है। इसमें शराब प्रमुख वजह बन रही है।
महिला अपराध का अड्डा बना एमपी नगर-
केस-1 - मार्च 2017: एमपी नगर जोन-2 में मंडीदीप निवासी छात्रा के साथ बाइक सवार मनचले ने जबरिया बाइक में बैठने का दबाव बनाते हुए छेड़छाड़ की। छात्रा ने हिम्मत जुटाकर आरोपी को दबोच लिया।
केस-2 - अक्टूबर 2016: सीएस (कंपनी सेक्रेटरी) की तैयारी कर रही 25 वर्षीय छात्रा के साथ बाइक सवार दो मनचलों ने अंजली होटल के पास छेड़छाड़ की। विरोध करने पर मनचलों ने की मारपीट।
केस-3 - अप्रैल 2016:फैशन डिजाइनर 24 वर्षीय छात्रा के साथ कार सवार तीन अपहरणकर्ताओं ने अपहरण का प्रयास किया। छात्रा जान बचाकर कार से कूदी।
ये भी लापरवाह कम नहीं
ज्यादातर कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा की नीति का पालन नहीं किया जा रहा। न तो गार्ड हैं, न ही सीसीटीवी कैमरे, न ही पार्किंग।
देर रात तक 'कोचिंग'
अधिकतर कोचिंग संस्थान तीसरे-चौथे माले पर हैं और लिफ्ट तक नहीं हैं। 25 फीसदी कोचिंग संस्थान रात 10 बजे तक खुलते हैं।
ऐसी है बसाहट -
10 कोचिंग संस्थानों के बीच एक बीयर बार।
03 बड़ी शराब दुकानें खुली हैं इसी क्षेत्र में।
07 हुक्का लाउंज सुबह से देर रात तक खुले हैं।
01 लाख छात्र-छात्राओं का हर रोज आना-जाना।
55 पुलिसकर्मी का स्टॉफ है एमपी नगर थाने में।
28 मामले छेड़छाड़ के दर्ज हुए दो साल में।
बेटियों और अभिभावकों ने ऐसे निकाला हल-
मैं यूपीएससी की तैयारी कर रही हूं। बीते कुछ दिनों से शहर में रेप की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिसके कारण कोचिंग की छुट्टी के बाद सभी गल्र्स एक साथ ग्रुप में जाती हैं।
- आकांक्षा जैन, स्टूडेंट
मेरी कोचिंग रात 8.30 बजे होती है, मुझे हॉस्टल पैदल जाना होता है। हॉस्टल जाते समय कुछ गलियां एेसी हैं, जहां बहुत कम लोगों का आना-जाना होता है। उस समय मैं काफी सतर्क रहती हूं। डायल 100 को फोन करने को तैयार रहती हूं।
- अंजलि जैन, स्टूडेंट
मैं बैंक की तैयारी कर रही हूं। एमपी नगर कोचिंग हब है। कोचिंग की सभी लड़कियां ग्रुप बनाकर ही जाती हैं, लेकिन पिछले दिनों जो घटना हुई है उससे आज भी असुरक्षा महसूस होती है।
- पूर्णिमा नामदेव, स्टूडेंट
मैं 12वीं की छात्रा हूं। शाम को कोचिंग जाना पड़ता है। होने वाली घटनाओं को देखते हुए कोचिंग से घर तक पहुंचने में डर लगता है। मेरे डर को देखते हुए मेरे पापा मुझे कोचिंग लेने व छोडऩे आते हैं।
- रजनी शेक, स्टूडेंट
Published on:
11 Nov 2017, 1:11 PM IST
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