
old pension scheme. कर्नाटक चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को ताकत दे दी है। हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। कर्नाटक चुनाव में कई मुद्दे छाए रहे, लेकिन क्या कांग्रेस की जीत के पीछे 'ओल्ड पेंशन स्कीम' को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक के 6 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवार के करीब 40 लाख से अधिक लोगों ने सरकार बदलने में अहम भूमिका निभाई।
मध्यप्रदेश में भी इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पहले ही पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की घोषणा कर चुकी है। मध्यप्रदेश में भी साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारी हैं, इनके अलावा साढ़े चार लाख से अधिक पेंशनर्स हैं और इनके परिवार के सदस्यों को मिला दिया जाए तो प्रदेश में 50 लाख लोग हैं जो मध्यप्रदेश के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
patrika.com पर प्रस्तुत है ओल्ड पेंशन योजना का मुद्दा कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाएगा...?
देश में राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाल हो चुकी है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने कर्नाटक में भी पुरानी पेंशन को बहाल करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया था। शनिवार को आए परिणामों के मुताबिक कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है। इसके बाद कर्नाटक में पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी जाएगी। कर्नाटक में यह योजना 2006 से लागू की जाएगी। यानी 2006 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को इसका लाभ दिया जाएगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में साढ़े सात लाख से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं और उनके जुड़े परिवार के लोग भी मतदाता हैं। वे काफी समय से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग लगातार कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में कुछ समय पहले हुए विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme (OPS)) बहाली की योजना को लेकर कांग्रेस ने पुन: सत्ता में वापसी की थी। इसी मुद्दे को कांग्रेस ने कर्नाटक में पकड़कर रखा।
क्या कर्नाटक में चला हिमाचल मॉडल
चुनाव प्रचार की शुरुआत में ही कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया। इसके अलावा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को 40 प्रतिशत वाली सरकार कहना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही सबसे बड़ा मुद्दा पुरानी पेंशन बहाली का वादा था, जिसने भी चुनाव पर बड़ा असर डाला। गौरतलब है कि कर्नाटक में पांच लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिजन मिलाकर करीब 50 लाख से अधिक लोग हैं, जिनकी नाराजगी भाजपा को झेलनी पड़ी। इससे पहले कांग्रेस ने ओल्ड पेंशन को लागू करने का वादा हिमाचल प्रदेश में भी किया था। वहां भी कांग्रेस को जीत मिली। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली के मुद्दे का असर कांग्रेस की जीत पर नजर आ रहा है। चुनाव से पहले मार्च में जब कर्नाटक के सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल की तो सीएम सोमप्पा बोम्मई ने सरकारी कर्मचारियों को अंतरिम राहत के रूप में उनके मूल वेतन में 17 प्रतिशत की वृद्धि करने की घोषणा कर दी थी। लेकिन, इसका असर नहीं पड़ा।
मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस लागू करेगी पुरानी पेंशन
मध्यप्रदेश में 6 माह में चुनाव होने वाले हैं। दोबारा सत्ता में आने की जी-तोड़ मेहनत कर रही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ भी कई बार ऐलान कर चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में बनेगी तो हम पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर देंगे। इसके अलावा महिलाओं, बेरोजगार युवाओं, उद्योग, निवेशकों के लिए भी कई वायदे कमलनाथ कर चुके हैं।
एकजुट हुए मध्यप्रदेश के कर्मचारी
मध्यप्रदेश में भी पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर प्रदेश के कई कर्मचारी संगठन एकजुट होने लगे हैं। हाल ही में इन्होंने प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि एक जनवरी 2005 के बाद जो भी सरकारी भर्ती हुई है, उसमें पुरानी पेंशन लागू नहीं है। जो बहुत ही गलत फैसला है। रिटायर्ड कर्मचारी के लिए इससे ज्यादा दुखदायी समस्या कोई नहीं हो सकती, जब वो कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। उन्हें आर्थिक सहयोग की जरूरत होती है। पहले भी यह व्यवस्था चलती थी। शिवराज सरकार को पुरानी पेंशन योजना को तत्काल बहाल कर देना चाहिए। क्योंकि नई पेंशन स्कीम कर्मचारी और उनके परिवार का जीवन यापन तक नहीं कर पाती है।
कैसी है पुरानी पेंशन योजना
पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारी के वेतन से कोई कटौती नहीं की जाती थी। जबकि नई पेंशन योजना (National Pension System) में 10 प्रतिशत की कटौती वेतन से होती है। इसमें 14 प्रतिशत हिस्सा सरकार मिलाती है। पुरानी पेंशन स्कीम में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सरकारी कोष से पेंशन दी जाती थी। नई स्कीम शेयर बाजार आधारित है। पुरानी स्कीम में जीपीएफ था, लेकिन नई स्कीम में यह सुविधा नहीं है। पुरानी स्कीम के तहत सेवानिवृत्त होते समय अंतिम वेतन की आधी रकम के बराबर पेंशन मिलती थी, लेकिन नई योजना में पेंशन कितनी मिलेगी इसकी भी गारंटी नहीं है।
एक नजर
अलट बिहारी सरकार ने 1 अप्रैल 2004 को पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को बंद करने का निर्णय लिया था। इसके बाद 2004 में पुरानी पेशन योजना के बदले राष्ट्रीय पेंशन योजना (National Pension System) शुरू की थी। जो कर्मचारी 22 दिसंबर 2003 के पहले निकली भर्ती के जरिए सरकारी नौकरी में शामिल हुए हैं, सिर्फ उन्हें ही पुरानी पेंशन का फायदा मिलेगा। नई पेंशन स्कीम 22 दिसंबर 2003 के बाद ज्वाइन होने वालों को मिल रही है।
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कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 माह बाद होने वाला चुनाव प्रदेश का भविष्य तय करेगा। मुझे विश्वास है कि मतदाता साथ देंगे। यह किसी पार्टी का चुनाव नहीं यह मध्यप्रदेश का भविष्य तय करने वाला चुनाव है। हर जगह हड़ताल, डाक्टरों की हड़ताल, वकीलों की हड़ताल हो रही है। कांग्रेस का बहुत अच्छा प्रदर्शन रहा है। शिवराज सिंह ने इतने सालों बाद बहनों को याद किया। उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया। वे अपना पाप धोने का काम कर रहे हैं। भाजपा पूरा प्रयास करेगी सौदा करने का। सौदाबाजी इनका डीएनए बन गया है। हमारी सरकार आएगी और सौदेबाजी का कोई स्कोप नहीं रहेगा।
Updated on:
13 May 2023 04:24 pm
Published on:
13 May 2023 04:20 pm
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