
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम में लाड़ली बहनों की लहर में कांग्रेस डूब गई। सुबह 8 बजे से रुझानों में बढ़त लेने के साथ ही भाजपा ने देर शाम सरकार बनाने के लिए 116 सीटों के जादुई आंकड़े से 47 ज्यादा 163 सीटें जीत लीं। कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ। 2018 के चुनाव की तुलना में 48 सीटें कम 66 सीटों पर ही पार्टी सिमट गई। 2018 में कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थी। एक सीट सैलाना की भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार ने जीती हैं। इसी के साथ भाजपा 2003 से लगातार (2020 को छोड़कर) पांचवीं बार सत्ता में लौटी। प्रचंड जीत के दौर में भी भाजपा सरकार के 12 मंत्री हार गए। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, प्रेमसिंह पटेल हारे। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 3 मंत्री महेंद्रसिंह सिसौदिया, राजवर्द्धनसिंह दत्तीगांव, सुरेश धाकड़ और तोमर खेमे के भारत सिंह कुशवाह को भी जनता ने नकार दिया। चुनाव से पहले मंत्री बने पूर्व सीएम उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी भी हारे। चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने 31 विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाया। इनमें भाजपा से 26 तो कांग्रेस से 4 जीते। वहीं इस बार विधानसभा में गुलाबी रंग दो फीसदी बढ़ा है।
इस बार विधानसभा में गुलाबी रंग दो फीसदी बढ़ा है। 26 महिलाएं (11.30%) जीतकर सदन पहुंची हैं। 2018 में 21 महिलाएं (9.1%) महिलाएं सदन में थीं। हालांकि 2013 में महिलाओं की भागीदारी 12.60 फीसदी (29 महिलाएं) थीं। इस बार भाजपा से 21 और कांग्रेस से पांच महिलाएं सदन पहुंचीं। दोनों दलों ने 56 महिलाओं को टिकट दिए थे। कांग्रेस ने 29 तो भाजपा ने 27 महिलाओं को मौका दिया था।
Updated on:
04 Dec 2023 11:27 am
Published on:
04 Dec 2023 11:25 am
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