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एमपी की 101 लोक संपत्तियां बिकीं, 5 लाख करोड़ का कर्ज चुकाने बेशकीमती प्रॉपर्टी बेच रही सरकार

MP News- सरकार ने जुटाए 1110 करोड़ रुपए, लोक परिसंपत्ति विभाग को नहीं पता दूसरे राज्यों में कितनी संपत्तियां

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MP Government Sells 101 Valuable Public Assets

MP Government Sells 101 Valuable Public Assets

सुनील मिश्रा, भोपाल. प्रदेश पर चढ़े करीब 5 लाख करोड़ के कर्ज को चुकाने के लिए सरकार लोक संपत्तियों को बेचकर राशि जुटाने में लगी हुई है। 2016 में प्रदेश में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के गठन के बाद से अब तक करीब 10 वर्षों में 101 लोक संपत्तियां नीलाम की जा चुकी हैं। इनसे सरकार ने करीब 1110 करोड़ रुपए जुटाए। विधानसभा में सवालों के लिखित जवाबों में यह जानकारी सामने आई है। यह भी खुलासा हुआ कि सरकार की संपत्तियां का लेखा-जोखा रखने के लिए बना लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग जरूर बना है, लेकिन इसके पास प्रदेश से बाहर दूसरे राज्यों में मप्र की संपत्तियों का कोई रेकॉर्ड ही नहीं है। यह विभाग केवल मध्यप्रदेश के विभिन्न विभागों की संपत्तियां बेचने का काम कर रहा है। इस बीच प्रदेश में लोक संपत्ति विक्रय को लेकर कई स्थानों पर विवाद भी हुए और कई संपत्तियों की बिक्री के दौरान स्टांप शुल्क भी नहीं चुकाया गया। बाद में खुलासा होने पर पंजीयन अधिकारियों द्वारा प्रकरण बनाकर वसूली की कार्रवाई की जा रही है।

हाल ही में केरल के वायनाड की संपत्ति बेचने का मामला कैबिनेट में आने के बाद से अन्य संपत्तियों की भी पड़ताल शुरू हो गई है। पिछले साल वित्त विभाग ने भी सभी विभागों से राज्य के बाहर की संपत्तियों, उनका मूल्य व संबंधित कोर्ट केस या विवाद का ब्योरा मांगा था। इसके बाद मुंबई, नागपुर, उत्तरप्रदेश आदि स्थानों पर संपत्तियां सामने आई हैं। तब से लगातार इन संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अंदरूनी प्लानिंग चल रही है।

इन प्रदेशों में मप्र की बेशकीमती प्रॉपर्टियां

केरल में बीनाची एस्टेट: मप्र सरकार की प्रोविडेंट इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड (पीआइसीएल) की केरल के वायनाड जिले में 554 एकड़ की बीनाची एस्टेट है। इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा केरल प्राइवेट फॉरेस्ट एक्ट के तहत केरल सरकार के अधीन कर दिया गया था। इस पर पीआइसीएल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। सुनवाई में कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद निपटाने के निर्देश दिए। तब से इस संबंध में मुख्य सचिवस्तर पर कई बार बातचीत हो चुकी है। इसे उचित मुआवजा लेकर केरल सरकार को ही सौंपने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसकी की कीमत अरबों रुपए है।

मुंबई में दो बड़ी प्रॉपर्टी: मुंबई के गोरेगांव इलाके में मप्र सरकार की लगभग 2.5 एकड़ (10,460 वर्गमीटर) जमीन है। इसे एक कंपनी को किराए पर दिया गया था। पीआइसीएल ने इसका किराया बढ़ाया तो कंपनी ने किराया देना बंद कर दिया। इसके बाद उसे बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। मुंबई में ही मप्र सरकार की दूसरी प्रॉपर्टी 2 हजार वर्ग मीटर से अधिक की एक तीन मंजिला प्रिंसेज बिल्डिंग है। इसे किराये पर दिया गया था लेकिन मुंबई महानगर पालिका ने इसे जर्जर घोषित कर दिया। अब रीडेंसिफिकेशन स्कीम के तहत इसका पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। इससे सरकार को करोड़ों की आय होने की संभावना है।

नागपुर में बस डिपो की 3 एकड़ जमीन:
नागपुर में मप्र सडक़ परिवहन निगम ने 1956 में बस डिपो के लिए जमीन खरीदी। लेकिन यह महाराष्ट्र सरकार के नाम पर दर्ज होने के बाद विवाद शुरू हो गया था। हालांकि करोड़ों की इस जमीन पर विवाद अब सुलझ गया है।

उप्र के झांसी में 19 एकड़ जमीन:

झांसी में मप्र की लगभग 19 एकड़ जमीनें हैं। ग्वालियर रियासत के समय की इस जमीन पर फिलहाल यूपी सरकार का कब्जा है। इसे वापस लेने यूपी सरकार के साथ बातचीत जारी है। बस डिपो की लगभग 1300 वर्ग मीटर जमीन को लेकर मामला कोर्ट में है।

बस डिपो से लेकर सहकारी प्लांटों की जमीन बिकी

प्रदेश में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ने बस डिपो से लेकर कई सहकारी कारखानों की जमीनें बेची हैं। अधिकांश जमीन बिल्डरों या कंपनियों ने खरीदी हैं। मुरैना बस डिपो की जमीन 67 करोड़ में, शहडोल बस डिपो की जमीन 9 करोड़, ब्यावरा बस डिपो की 12 करोड़ में, तराना बस डिपो की जमीन 17 करोड़ में बेच दी गई। इसके साथ आलीराजपुर, महिदपुर आदि बस डिपो की जमीन भी बेची। सहकारिता विभाग का मुरैना के जरेरूआ का तिलहन संघ प्रसंस्करण संयंत्र, पुराना जेल कंपाउंड खरगोन, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस इटारसी, सोयाबीन प्रसंस्करण संयंत्र नागझिरी आदि भी बेचे जा
चुके हैं।

कैबिनेट में सरकार ला सकती है प्रस्ताव
प्रदेश में कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। कई बार कर्ज और उसके ब्याज को पटाने के लिए भी लोन लेने के हालात बन जाते हैं। इन स्थितियों में सरकार प्रदेश की लोक संपत्तियों को बेचकर राजस्व जुटाने का प्रयास कर रही है। इससे संबंधित बीते मंगलवार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन सरकार को मिलने वाले राजस्व का सही आकलन नहीं होने के कारण इसे टाला गया। केरल की प्रॉपर्टी को लेकर सरकार संभवत अगली कैबिनेट बैठक में इस विक्रय संबंधी प्रस्ताव ला सकती है।