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अफसरों की चाकरी में जुटा रखे हैं 4076 ट्रेड आरक्षक, हर महीने 18 करोड़ रुपए से अधिक दे रहे वेतन

-ट्रेड आरक्षकों को जनरल ड्यूटी में संविलियन पर पीएचक्यू की आनाकानी, गृहमंत्री के पत्र की भी अनदेखी

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अफसरों की चाकरी में जुटा रखे हैं 4076 ट्रेड आरक्षक, हर महीने 18 करोड़ रुपए से अधिक दे रहे वेतन

अफसरों की चाकरी में जुटा रखे हैं 4076 ट्रेड आरक्षक, हर महीने 18 करोड़ रुपए से अधिक दे रहे वेतन

भोपाल. मप्र में 4076 ट्रेड आरक्षकों के वेतन पर राज्य शासन हर महीने 18 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करता है, पर इन ट्रेड आरक्षकों से आला पुलिस अफसरों के बंगलों पर चाकरी करवाई जा रही है। हम बात कर रहे हैं मप्र के उन ट्रेड आरक्षकों की जो प्रमोशन पाकर एएसआइ के पद पर पहुंचे हैं, पर इनसे बंगलों पर घरेलू काम करवाया जा रहा है। ट्रेड आरक्षक लंबे समय से जनरल ड्यूटी में संविलियन की मांग कर रहे हैं, पर वर्ष 2012 में पुलिस मुख्यालय ने ट्रेड आरक्षकों की जनरल ड्यूटी पर संविलियन पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ कई पुलिसकर्मी कोर्ट गए और उन्हें जनरल ड्यूटी की अनुमति मिली। ट्रेड आरक्षकों की मांग पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने 24 मार्च को पत्र लिखकर ट्रेड आरक्षकों का संविलियन करने को कहा था। इस पर गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से अभिमत मांगा गया, जो अभी तक नहीं दिया गया है। बहरहाल, आरक्षक से लेकर एएसआइ तक वेतन के रूप में 27000 रुपए से लेकर 68000 रुपए का भुगतान किया जाता है। इस हिसाब से औसतन शासन 4076 ट्रेड आरक्षकों के वेतन पर 18 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च कर रहा है। ये राशि सालाना 200 कर3ोड़ से अधिक है, पर इनसे बंगलों पर चाकरी करवाई जा रही है। पुलिसकर्मियों को सालभर में 13 महीने का वेतन दिया जाता है। ट्रेड आरक्षकों के परिजनों ने 23 मई को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर बंगलों से ड्यूटी हटाने और उन्हें जनरल ड्यूटी में संविलियन करने की मांग की थी। इनका कहना है कि छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र में संवलियन प्रक्रिया जारी है, पर इसे मप्र में एकतरफा निर्णय कर बंद कर दिया गया है।

अफसरों के बंगलों पर ट्रेड आरक्षकों की फौज
मप्र पुलिस में ट्रेड आरक्षक मसलन धोबी, मोची, नाई, रसोइया समेत अन्य कार्यों के लिए भर्ती की जाती है। यहां बता दें, ट्रेड आरक्षक और जनरल ड्यूटी आरक्षकों का वेतनमान (5200-20200) एक समान है। इन ट्रेड आरक्षकों को पुलिस के आला अफसरों के बंगलों पर तैनात किया गया है। कई अफसर ऐसे हैं, जिन्हें पात्रता एक या दो अर्दलियों की है, उन्हें 10 से 12 आरक्षक दिए गए हैं। ये आरक्षक तीन शिफ्ट में बंगलों पर ड्यूटी करते हैं। ट्रेड आरक्षकों का आरोप है कि पुलिस अफसर बंगलों पर कर्मचारियों की तैनाती बनाए रखने के लिए उनके संविलियन के मामले को अटकाकर रखे हैं।
प्रमोशन लेने को तैयार नहीं ट्रेड आरक्षक
बंगलों पर घरेलू कार्यों में जुटे रहने वाले ट्रेड आरक्षक प्रमोशन लेने को भी तैयार नहीं है। इसकी वजह प्रमोशन मिलने के बाद भी घरों में काम करते रहना है। ट्रेड आरक्षकों का तर्क है कि जनरल ड्यूटी में संविलियन से शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि ट्रेड आरक्षकों और जीडी आरक्षकों का वेतनमान एक समान है। इसके अलावा मैदानी पुलिस बल की कमी को भी दूर किया जा सकेगा। जो ट्रेड आरक्षक के पद रिक्त होंगे वहां नई भर्ती के रास्ते खुलेंगे।