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हनीट्रैप के नाम पर नेता, अफसर और पत्रकार एसआईटी के सर्विलांस पर

- मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ अफसरों को भी एसआईटी ने लिया सर्विलांस पर- एसआईटी और एसटीएस की कार्रवाई से मुख्यमंत्री नाराज, हो सकती है कार्रवाई

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भोपाल

हनीट्रैप का जाल मध्यप्रदेश में लगातार मुश्किलें खड़ी करता जा रहा है। मुख्यमंत्री जहां एसआईटी की भूमिका को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं, वहीं अब नया खुलासा हुआ है कि एसआईटी ने जांच के नाम पर नेता, अफसरों और पत्रकारों को सर्विलांस पर रख दिया है। इतना ही नहीं, इस जांच के दायरे में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अफसर के स्टाफ को भी शामिल कर लिया गया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसको अनाधिकृत तौर पर अफसर, पत्रकार और नेताओं को सर्विलांस पर रखे जाने पर नाराजगी जाहिर की है।







दरअसल, मध्यप्रदेश में हनीट्रैप मामले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। नेता, अफसर और पत्रकारों के गठजोड़ की बात कही जा रही है। भाजपा के सरकार के तत्कालीन मंत्रियों के अलावा वर्तमान सरकार के मंत्री और अफसरों के नाम इस कांड में जुड़ रहे हैं। मंत्रालय में पदस्थ कई अफसरों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच में बड़ा खुलासा हुआ है कि जांच के नाम पर काउंटर इंटेलीजेंस ने अफसरों और नेताओं के साथ पत्रकारों को सर्विलांस पर रख दिया है। उनके हर मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक अधिकारी के स्टाफ पर भी नजर रखी जा रही है। हालांकि एसटीएफ और साइबर क्राइम के स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा भी डीजीपी पर आरोप लगा चुके हैं कि उनको सर्विलांस पर रखा जा रहा है। उनके हर मूवमेंट को पुलिस ट्रैक कर रही है। हालांकि मुख्यमंत्री ने एटीएस चीफ की इस कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने साफ किया है कि आखिर इतने लोगों को सर्विलांस पर रखने का मतलब क्या है?

शक के दायरे में हर कोई

मुख्यमंत्री ने एक रोज पहले ही अफसरों को बुलाकर साफ किया है कि जांच के नाम पर लीकेज बंद किए जाएं। संभावित नामों के नाम पर जो आईपीएस और आईएएस के बीच में मोर्चा खुला है, उसे भी तत्काल बंद किया जाए। इतना ही नहीं, उन्होंने साफ कहा है कि जांच जारी रहे, लेकिन उसके बारे में कोई भी बात मीडिया या दूसरे लोगों को लीक न किया जाए।

डीजीपी के राडार से बाहर होंगे पुरुषोत्तम शर्मा

डीजीपी और पुरुषोत्तम शर्मा के विवादों के बीच में माना जा रहा है कि पुरुषोत्तम शर्मा को उनके पद से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी पर भेजा जा सकता है। कहा जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से खुद ही मांग की है कि उन्हें डीजीपी के प्रभाव से बाहर की पोस्टिंग दी जाए। ऐसे में संभव है कि पुरुषोत्तम शर्मा को पुलिस मुख्यालय की जिम्मेदारी से बाहर कर दूसरी भूमिका दी जा सकती है।