
MLA Nilesh Uikey News
Transfer News - एमपी के जो कर्मचारी, अधिकारी सालों से एक ही जगह पर जमे हैं, उनपर जल्द ही गाज गिरनेवाली है। खासतौर पर ऐसे पटवारी, आरआई और बाबू, पहली फुर्सत में नपेंगे। राज्य के राजस्व मंत्री ने विधानसभा में यह बयान दिया है। एक विधायक ने प्रदेशभर के ऐसे कर्मचारियों, अधिकारियों के संबंध में विधानसभा में सवाल पूछा जोकि कई सालों से एक ही जगह पदस्थ हैं। उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश की ट्रांसफर Transfer नीति के अंतर्गत कर्मचारियों, अधिकारियों को इधर से उधर किया जाएगा।
मध्यप्रदेश में ज्यादातर अधिकारी, कर्मचारी सालों तक एक ही स्थान पर जमे रहते हैं। कई मामले तो ऐसे हैं कि कर्मचारी ने जहां ज्वाइनिंग की, उसी जगह से रिटायर भी हो गए। सालों से जमे कर्मचारियों, अधिकारियोें की खूब शिकायतें आती हैं और उन्हें हटाने की मांग भी की जाती है। हर बार चुनावों के वक्त कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों को हटा भी दिया जाता है पर बाद में वे फिर अपने पसंदीदा स्थान पर आ जाते हैं।
सालों से एक ही जगह पर पदस्थ ऐसे कर्मचारियों, अधिकारियों पर पांढुर्ना विधायक नीलेश उइके ने विधानसभा में सवाल पूछा जिसपर मंत्री का बड़ा बयान सामने आया। विधायक उइके ने पांढुर्ना जिले में चार साल से जमे कर्मचारियों का मुद्दा उठाया था।
विधायक नीलेश उइके ने पांढुर्णा जिला के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों की तहसीलों व राजस्व अनुभागों में पदस्थ कर्मचारियों, अधिकारियों के बारे में प्रश्न किया। विधायक ने लिपिक, आरआई व पटवारी के एक ही स्थान पर चार वर्षों से अधिक समय से पदस्थ होने का मुद्दा उठाया।
पांढुर्णा विधायक नीलेश उइके के इस सवाल पर प्रदेश के राजस्व मंत्री की ओर से जवाब आया। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि शासन की आगामी स्थानांतरण Transfer नीति में निहित प्रावधान अनुसार ऐसे कर्मचारियों, अधिकारियों को अन्यत्र पदस्थ करने की कार्यवाही की जाएगी।
विधायक नीलेश उइके ने पांढुर्णा व छिंदवाड़ा जिले में एसटी व्यक्तियों को अपनी भूमि गैर व्यक्तियों को बेचे जाने के बारे में भी पूछा। इस पर बताया कि जिला पांढुर्ना का गठन अक्टूबर 2023 में हुआ है। जिला गठन के बाद वर्तमान तक अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसी भी सदस्य की भूमि गैर अनुसूचित जनजाति को विक्रय किए जाने की अनुमति प्रदान नहीं की गई है। जिला छिंदवाड़ा में एसटी व्यक्तियों को अपनी भूमि गैर एसटी को विक्रय करने की अनुमति देते समय उनके पास जीवन-यापन करने नियमानुसार शेष भूमि रखी गई है। वर्ष 2018 से कुल 90.822 हेक्टेयर भूमि की अनुमति प्रदान की गई है।
Published on:
25 Mar 2025 06:29 pm
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