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भोपाल में बनेगा ‘1210 मीटर लंबा रेल ब्रिज’, 49 करोड़ होगी लागत; इन इलाकों की दूरी घटेगी

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रेल ब्रिज का निर्माण होने जा रहा है। जिसकी लागत करीब 49 करोड़ रूपये होगी।

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MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की नर्मदापुरम रोड पर शहर का 11वां रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जाएगा। ये ब्रिज बावड़िया कलां चौराहे से लेकर ऑशिमा मॉल तक बनाया जाएगा। जिसकी मंजूरी दे दी गई है।

इन इलाकों से दूरी घटेगी

ईपीसी यानी इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मॉडल पर बनने वाले ब्रिज की लंबाई 1210 मीटर होगी और इससे कोलार, बावड़िया कला, सलैया, गुलमोहर, त्रिलंगा जैसे इलाकों की कटारा हिल्स, बागसेवनिया, बागमुगालिया मिसरोद से दूरी तीन से चार किमी तक कम हो जाएगी। शहर में इससे पहले सिंगारचोली, छोला, करोंद, भारत टॉकीज, पुल बोगदा, ऐशबाग, सुभाष नगर, चेतक ब्रिज, सावरकर सेतु, बावड़िया आरओबी बनकर तैयार हो चुके है।

50 करोड़ का डिजाइन तैयार

इस आरओबी के लिए पीडब्ल्यूडी ने 50 करोड़ रुपए में ब्रिज की डिजाइन से लेकर निर्माण और दस साल तक रखरखाव का जिम्मा निजी एजेंसी के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मार्च 2026 में ब्रिज की नींव का काम शुरू हो जाएगा, जो अगले 24 माह में पूरा होगा। यानी वर्ष 2028 की पहली तिमाही तक तक कोलार, बावड़िया कॉला की ओर से सीधे विद्यानगर फेस दो आइएसबीटी के पास तक का रास्ता तैयार हो जाएगा।

आशिमा मॉल से बावड़ियाकला आरओबी को ईपीसी मोड से बनाया जाएगा। मार्च तक निर्माण एजेंसी तय करके काम शुरू करवा दिया जाएगा।- पीसी वर्मा, सीई ब्रिज पीडब्ल्यूडी

ऐसा होगा ईपीसी मॉडल

पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी की होती है। ये सिंगल पॉइंट रिस्पॉन्सिबिलिटी पर आधारित रहेगा। डिजाइन और निर्माण एक ही कंपनी करती है तो डिजाइन संबंधी विवादों के कारण काम नहीं रुकता है। ठेकेदार पर भी ब्रिज के रखरखाव की जिम्मेदारी भी लंबे समय तक रहती है तो गुणवत्ता के बेहतर होने की स्थिति बनती है। इसमें प्रोजेक्ट की लागत पहले से तय होती है, इसलिए सामग्री के दाम बढ़ने पर भी सरकार पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

एक समस्या ये भी

ब्रिज को आशिमा मॉल की तरफ नहीं ले जाएंगे। नर्मदापुरम सिक्सलेन बीआरटी रोड के पहले ही विद्यानगर आइएसबीटी पर ये उतरेगा। इससे आशिमा मॉल के सामने की ओर चौराहा बनेगा। सिग्नल सिस्टम और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनेगी। ब्रिज से उतरने के बाद सीधी राह की बजाय चौराहे की बाधा बनी रहेगी।