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MP पुलिस की तरह होगी जेल में ‘बाल आरक्षक’ की नियुक्ति, राज्य शासन को भेजा प्रस्ताव

MP News: मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग की तरह जेल विभाग में बाल आरक्षकों की नियुक्ति हो सकती है। इसके लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है।

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Bank Manager Levels Serious Allegations Against Retired Deputy Collector Sanjay Upadhyay in Bhopal

Bank Manager Levels Serious Allegations Against Retired Deputy Collector Sanjay Upadhyay in Bhopal-Demo pic

MP News: मध्यप्रदेश में अब पुलिस की तरह जेल विभाग में भी बाल आरक्षक की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। जेल विभाग ने इस संबंध में राज्य शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही यह नियम लागू हो जाएगा। इससे उन कर्मचारियों के बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके अभिभावक का सेवा के दौरान निधन हो गया और जीवनसाथी नौकरी के लिए पात्र नहीं है या किसी कारणवश सेवा नहीं करना चाहता।

जेल विभाग में लागू नहीं है ऐसी व्यवस्था

अभी तक पुलिस विभाग में यह व्यवस्था लागू है, लेकिन जेल विभाग में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जबकि दोनों विभागों की कार्यप्रणाली और भर्ती नियम लगभग समान है। इसी असमानता को दूर करने के लिए लंबे समय से जेल प्रहरी और अन्य कर्मचारी मांग कर रहे थे। जेल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह कदम कर्मचारियों के मनोबल को भी मजबूत करेगा। अब सबकी नजर राज्य शासन की मंजूरी पर टिकी है। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है तो जेल विभाग में भी बाल आरक्षक व्यवस्था नई उम्मीद लेकर आएगी।

पढ़ाई के साथ मानदेय भी मिलेगा

प्रस्ताव के मुताबिक, बाल आरक्षक बनने वाले बच्चों को बालिग होने तक नियत मानदेय दिया जाएगा। इस दौरान उनकी पढ़ाई जारी रहेगी। उन्हें प्रतिदिन दो से तीन घंटे कार्यालय आना होगा, हालांकि विशेष परिस्थितियों में छूट भी दी जा सकती है। 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर नियमित आरक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया जाएगा। उन्हें

परिवारों को आर्थिक सुरक्षा

सेवा के दौरान कर्मचारी के निधन के बाद अक्सर परिवार आर्थिक संकट में घिर जाते हैं। कई मामलों में जीवनसाथी पात्र नहीं होता या नौकरी करने में असमर्थ रहता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर असर पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर ऐसे परिवारों को स्थायी सहारा मिल सकेगा और बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होगी।