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27% OBC आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट ने फिर हाईकोर्ट भेजा, MP में बढ़ेगी सियासी हलचल

mp obc: गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब अंतिम फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा। पढ़ें विस्तार से...।

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भोपाल

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Manish Geete

Feb 19, 2026

mp obc reservation

मध्यप्रदेश के ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला दिया है...। फोटो (एआई जनरेटेड)

mp obc: मध्यप्रदेश के 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश दिया है। लंबी कानूनी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट वापस भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा। इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही सियासी हलचल अब तेज हो सकती है।

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का कानूनी विवाद लंबे समय से चल रहा है। साल 2019 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस मामले को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को भेजने का आदेश दे दिया। गुरुवार को हुई सुनवाई को कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब अंतिम फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा। हाईकोर्ट को आदेश मिले हैं कि वह इस कानून की संवैधानिक वैधता की जांच करे। फिलहाल मध्यप्रदेश में 13 फीसदी ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट की पुरानी अंतरिम रोक जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला पिंग-पोंग बॉल की तरह यहां से वहां घूम रहा है, जो उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस पर ठोस निर्णय होना चाहिए।

एमपी की मौजूदा स्थिति

मध्यप्रदेश में मौजूदा आरक्षण में ओबीसी को 14 फीसदी है, जबकि 20 फीसदी आरक्षण एससी और 16 फीसदी आरक्षण एसटी वर्ग को मिला हुआ है। जबकि 10 फीसदी आरक्षण इडब्ल्यूएस को दिया जाता है। इस स्थिति में सभी को जोड़ने पर मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण 60 फीसदी प्रतिशत हो गया है। जब ओबीसी का आरक्षण 14 से 27 फीसदी किया जाता है तो एमपी का कुल आरक्षण 73 फीसदी हो जाएगा।

क्या है 27 फीसदी आरक्षण की कहानी

साल 2019 में मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार थी। इस दौरान कमलनाथ सरकार ने एमपी के ओबीसी वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी देने का ऐलान कर दिया था। इसके पीछे कहा गया था कि मध्यप्रदेश में ओबीसी की आबादी 48 फीसदी है, इसलिए आरक्षण बढ़ना चाहिए। इसलिए 27 फीसदी आरक्षण देने का फैसला कर लिया। इसके बाद कमलनाथ सरकार विधानसभा में अध्यादेश लेकर आ गई। इसके बाद कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल हो गईं। याचिका में तर्क था कि इस हिसाब से एमपी में आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी यानि मंडल आयोग केस 1992 में तय सीमा का उल्लंघन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मई 2020 में एमपी हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में 27 फीसदी आरक्षण को लागू करने पर रोक लगा दी थी। यानि स्टे दे दिया था। इसके बाद कई भर्ती अटक गई। बाकी 13 फीसदी पर रोक लग गई। जो 14 फीसदी पहले से आरक्षण जारी था, उसे ही मिल पाई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाते समय कहा था कि कुल आरक्षण सीमा 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती।

एमपी में बढ़ेगी सियासी हलचल

ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से खींचतान कर रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस कहती है कि हमने 27 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है, और भाजपा उसे रोकने का प्रयास कर रही है, जबकि भाजपा भी दावा करती है कि हम ओबीसी वर्ग के लिए ही काम कर रहे हैं। गुरुवार को आए के बाद अब राजनीतिक दलों के बयानों का इंतजार है।