
Vulture State mp counting vulture in MP: प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रेस्क्यू कर लाए गए गिद्धों कोउनके प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे सीएम मोहन यादव( photo:patrika creative)
MP Vulture Counting Estimation: मध्य प्रदेश एक बार फिर वल्चर स्टेट घोषित किया जा सकता है। 20 फरवरी से 22 फरवरी तक मध्य प्रदेश में चले वल्चर एस्टिमेशन में इस बार 1538 बाघ पाए गए हैं। पिछले साल 2025 में जहां इनकी संख्या 12000 थी वहीं एक साल में इनकी संख्या 3038 तक बढ़ी है। इस अवसर पर सीएम मोहन यादव भी दोपहर 3.45 बजे हलाली डैम के वनक्षेत्र में पांच गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में आजाद करने वाले हैं। रेस्क्यु किए गए इन पांच गिद्धों की रिहाई का कार्यक्रम मध्यप्रदेश वन विभाग की पुनर्वास और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग की पहल का हिस्सा है।
इन पांच गिद्धों में एक सिनेरियस (काला गिद्ध) और चार लॉन्ग बिल्ड गिद्ध शामिल हैं। बता दें कि ये गिद्ध प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रेस्क्यू कर लाए गए थे, वैज्ञानिकों की निगरानी में उपचार के बाद इन्हें वापस अपने घर भेजने की तैयारी है।
करीब डेढ़ साल के सिनेरियस गिद्ध को 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज से बचाया गया था। यह प्रजाति दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में गिनी जाती है और भारत में शीतकालीन मेहमानों के रूप में देखी जाती है। उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इसे फिर से जंगल में छोड़ना इनके संरक्षण की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
2025 में विदिशा, मंडला, बैतूल और सिवनी से चार लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों का रेस्क्यू किया गया था। इनका उपचार किया गया और पुनर्वास वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ।
इन गिद्धों को आज शाम 3 बजे सीएम मोहन यादव रिहा करेंगे। रिहाई से पहले इन्हें GPS टैग लगाए गए हैं। ताकि इन गिद्धों की उड़ान, भोजन और व्यवहार की निगरानी की जा सके। यह डेटा भविष्य की संरक्षण नीति तय करने में मदद करेगा।
लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों को पशुओं में उपयोग होने वाली डायक्लोफिनेक, केटोप्रोफेन और एस्किलोफेनाक दवा के कारण काफी नुकसान पहुंचा था। यह दवा गिद्धों के लिए घातक साबित हुई। शवों को खाते समय ये दवाएं गिद्धों के शरीर में चली जाती थीं और इनकी संख्या में 90% से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। गिद्धों पर घातक प्रभाव के बाद 2008 में ये दवाएं प्रतिबंधित कर दी गईं। यही कारण था कि इस प्रजाति को IUCN की गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया।
ऐसे में इनका संरक्षण महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि गिद्धों को पर्यावरण संतुलन के लिए अहम माना जाता है। यह धरती के सफाईकर्मी कहलाते हैं। गिद्ध मृतप्राय प्राणियों के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मध्य प्रदेश में इनकी संख्या बढ़ने का कारण है इनकी सुरक्षा की नियमित मॉनटरिंग। वन विभाग इनके नेस्ट की निगरानी करता है, उन्हें प्रोटेक्शन दिया जा रहा है।
जानलेवा पेस्टीसाइड डाइक्लोफिनिक पर प्रतिबंध लगना भी बड़ी वजह है। दरअसल पेस्टिसाइड पशुओं को लगाई जाती थी। ऐसे में जब इन पशुओं की मौत होती थी और गिद्ध इनके शव खाते थे, तो ये गिद्धों के लिए जानलेवा साबित होती थी।
2026 में गिद्धों की गिनती के दौरान वन विभाग हैरान था क्योंकि उन्होंने देखा कि अब एमपी मे बसने वाले गिद्धों की लाइफ स्टाइल भी बदल रही है। वे आमतौर पर ऐसे स्थानों को अपना घर चुनते हैं, जो बहुत ऊंचाइ पर हैं। लेकिन जिले के बाहर या सीमावर्ती क्षेत्रों में अब बड़े-बड़े मोबाइल टॉवर भी इनका रहवास बन रहे हैं। ये रातभर से लेकर धूप खिलने तक इन पर बैठे नजर आ जाए। प्रदेश के कई स्थानों पर वन विभाग की टीम ने ऐसे विज्युअल्स भी जुटाए हैं।
बताते चलें कि गिद्धों की गणना में उड़ते गिद्धों की गणन नहीं की जाती है। इस गणना में केवल वही गिद्ध गिने जाते हैं, जो जमीन पर या पेड़ों पर बैठे नजर आते हैं।
20 से 22 फरवरी 2026 के बीच हुई वल्चर काउंटिंग में रायसेन वन मंडल ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहले दिन यहां- 1187 गिद्ध नजर आए, दूसरे दिन- 1306 और तीसरे दिन- 1532 गिद्ध दर्ज किए गए। यहां सबसे ज्यादा 899 गिद्ध जिले के पश्चिम परिक्षेत्र में दर्ज किए गए, जो कुल संख्या का 60 फीसदी से ज्यादा है।
लॉन्ग बिल्ड, व्हाइट रम्प्ड, हिमालयन, यूरेशियन, रेड हेडेड और इजिप्शियन गिद्ध की प्रजातियां इस गणना में नजर आईं। हर साल की तरह इस बार भी गिद्धों की गणना में इनकी संख्या में बड़ा इजाफा नजर आया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी मध्य प्रदेश को वल्चर स्टेट का तमगा मिल सकता है।
भारत में गिद्धों की कुल 9 प्रजातियां पाई जाती हैं। 2025 की रिपोर्ट पर नजर डाली जाए, तो एक साल पहले भी मध्य प्रदेश देश में नंबर वन पर आकर वल्चर स्टेट बना था।
अन्य राज्यों में गिद्धों की संख्या की स्थिति से स्पष्ट है कि एमपी नंबर वन गिद्ध संरक्षण करने वाला राज्य और अन्य राज्यों के लिए मॉडल भी बना।
मध्यप्रदेश में गिद्धों की गणना 2026 में पहली बार मोबाइल ऐप के माध्यम से की गई है। इस डिजिटल गणना के लिए ईुपी कलेक्ट फाइव ऐप का उपयोग किया गया। डिजिटल गिनती के इस तरीके से वन विभाग की टीमों को कागज पैन की जरूरत नहीं पड़ी। गिनती के दौरान टीम जब गिद्धों के ठिकानों पर पहुंचती है, तो वहां की लोकेशन ऐप के माध्यम से मोबाइल पर नजर आने लगती है। ये ऐप ऑटोमैटिक समय भी ले लेता है। टीम वहीं से गिद्धों की फोटो खींचकर ऐप में अपलोड करती जाती है। ऐप में गिद्धों की संख्या भरनी होदी है, इसमें अलग-अलग दर्ज किया जाता है कि टीम को छोटे-बड़े कितने गिद्ध नजर आए। कौन सी प्रजाति के थे, ये जानकारी भी फीड की जाती है। इस तरह डिजिटल काउंटिंग से गिद्धों की जानकारी तुरंत कंपाइल हो जाती है।
इंदौर के मास्टर ट्रेनर अजय गडिकर के मुताबिक एक वयस्क गिद्ध की जोड़ी एक साल में एक ही अंडा देती है। ऐसे में इनकी संख्या बेहद धीमी गति से बढ़ती है। इसके लिए भी पहले इनका प्रोटेक्शन जरूरी है। इनके घरों को सुरक्षित रखना होता है। 1990 के दशक में देशभर में अधिसंख्य गिद्ध थे। लेकिन अब देशभर में ये हजारों ही रह गए हैं। हालांकि इजिप्शन प्रजाति के गिद्ध कई बार दो अंडे भी देती हैं।
Published on:
23 Feb 2026 02:36 pm
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