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नाट्य विद्यालय को मिला नया भवन, जुलाई से शुरू होगा पीजी कोर्स और ब्लैक बॉक्स थिएटर

मप्र नाट्य विद्यालय उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी कार्यालय की जगह होगा शिफ्ट

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भोपाल। मप्र नाट्य विद्यालय को स्थापना के करीब 10 वर्ष बाद स्थायी भवन मिल गया है। विद्यालय को नए भवन के रूप में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी में शिफ्ट किया गया है। यहां क्लासेस भी शुरू हो गई है। नए सत्र से यहां दो वर्ष का पीजी डिप्लोमा भी शुरू कर दिया जाएगा। इस डिप्लोमा को ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हो गई है। दो वर्ष के पीजी डिप्लोमा कोर्स के लिए नया सिलेबस तैयार हो गया है।

अब तक एक वर्ष का डिप्लोमा ही होता था
विद्यालय के निदेशक टीकम जोशी ने बताया कि अभी तक एक वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित किया जाता था, जिसमें 26 सीटें थी और देशभर के विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता होती थी। इस एक वर्ष के डिप्लोमा को किसी भी यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त नहीं थी। नई शुरुआत के साथ एक वर्ष के कोर्स को दो वर्ष के लिए कर दिया है। साथ ही पीजी डिप्लोमा कोर्स को राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हो गई है। 26 सीट को भविष्य में बढ़ाने पर भी अब काम किया जाएगा।

सेट प्रॉपर्टी और लाइब्रेरी हो चुकी है शिफ्ट
टीकम जोशी ने बताया कि अभी बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम जारी है। इसकी छत वॉटर प्रूफिंग तरीके से तैयार की जा रही है। नए भवन में क्लासेस दो हॉल में चल रही हैैं। साथ ही रिहर्सल के लिए ब्लैक बॉक्स थिएटर भी तैयार किया गया है, जिसमें एक साथ सभी स्टूडेंट्स आसानी से रिहर्सल और नाटक का मंचन कर सकते हैैं। अभी यहां दिन में 3 शिफ्ट में क्लासेस लग रही हैं। अकादमी भवन में फिलहाल नाट्य विद्यालय के छात्रों की क्लास और रिहर्सल चल रही है। साथ ही सेट प्रॉपर्टीज और लाइब्रेरी भी शिफ्ट हो चुकी है। नए कोर्स की शुरुआत जुलाई से होगी, तब तक नाट्य विद्यालय का कार्यालय भी अकादमी में शिफ्ट हो जाएगा। वर्ष-2011 में स्थापित हुए मप्र नाट्य विद्यालय का अभी तक कोई स्थायी भवन नहीं था। स्थापित होने के सात साल तक विद्यालय एलबीटी परिसर में किराए के भवन में चला, उसके बाद 2018 से अस्थायी रूप से मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन में संचालित हो रहा था। नए भवन में पहुंचने से विद्यार्थियों को क्लास और रिहर्सल के लिए पर्याप्त स्थान मिल सकेगा। जिसकी अभी तक कमी थी। जगह कम होने की वजह से दो से तीन बैच लगाए जाते थे। अब स्टूडेंट एक साथ एक मंच पर रिहर्सल कर सकेंगे।