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भोपाल-रायसेन के बीच बनेगा एमआरएफ सेंटर, 2600 केजी प्लास्टिक प्रतिदिन गलेगी, जिसका उपयोग सड़क बनाने में होगा

- भोपाल की 187 पंचायतों से 930, रायसेन केजी प्लास्टिक प्रतिदिन हो सकती है एकत्र, - रायसेन जिले की 494 पंचायतों से 1670 केजी, कुल 2600 केजी प्रतिदिन - सूखे कचरे में प्लास्टिक होगी अलग, गीले कचरे से बनेगी जैविक खाद, गंदा पानी डबल फिल्टर से होकर जाएगा किचिन गार्डन में

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भोपाल-रायसेन के बीच बनेगा एमआरएफ सेंटर, 2600 केजी प्लास्टिक प्रतिदिन गलेगी, जिसका उपयोग सड़क बनाने में होगा

सूखे कचरे में प्लास्टिक होगी अलग, गीले कचरे से बनेगी जैविक खाद, गंदा पानी डबल फिल्टर से होकर जाएगा किचिन गार्डन में

भोपाल. भोपाल-रायसेन दो जिलों के बीच में एक एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटेशन ) सेंटर बनेगा। जिसमें भोपाल की 187 और रायसेन जिले की 494 पंचायतों से निकलने वाले प्लास्टिक वेस्ट को गलाकर उसे रूरल रोड डवलपमेंट एजेंसी को दिया जाएगा। इसी एजेंसी के जिम्मे ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें हैं। एमआरएफ सेंटर में प्लास्टिक वेस्ट से तैयार किए गए मैटेरियल (डामर ) का उपयोग पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क बनाने के लिए होगा। वर्तमान में यहां की सड़कों में प्लास्टिक वेस्ट से बना मैटेरियल सड़कों में उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत दोनों जिलों की पंचायतों से निकलने वाले प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग सड़क बनाने में होगा तो उसकी लागत भी कम आएगी। ये काम स्व सहायता समूहों के माध्यम से किया जाएगा। प्लास्टिक वेस्ट बेचने जो इनकम होगी वो इन्हें ही मिलेगी।

संतोष झारिया, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन ने बताया कि दोनों जिलों के एक एमआरएफ सेंटर में प्रतिदिन प्लास्टिक वेस्ट गलाया जाएगा। वहीं गीले कचरे को एक जगह डंप कर स्व सहायता समूहों की तरफ से खाद बनाकर बाजार में बेची जाएगी। इसके लिए जिला पंचायत विभाग की तरफ से सर्वे पूरा करा लिया है। सर्वे में सिर्फ भोपाल की पंचायतों से करीब 930 केजी प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन निकलने का अनुमान है। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक भी शामिल है। इसी प्रकार रायसेन की 494 पंचायतों से 1670 केजी प्लास्टिक वेस्ट एकत्र होने का अनुमान है। दोनों जिलों का कुल 2600 केजी प्लास्टिक वेस्ट एफआरएफ में जाएगा।

घर के गंदे पानी का उपयोग किचिन गार्डन में होगा
ओडीएफ प्लस के तहत घर के सूखे, गीले कचरे के अलावा पंचायतों में घरों से निकलने वाले गंदे पानी का उपयोग भी किचिन गार्डन में किया जाएगा। इसके लिए किसी घर में आगे तो किसी में पीछे की तरफ से उस हिस्से को गार्डन में तब्दील किया जाएगा, जहां वेस्ट वॉटर जाता है। इसके लिए बाकायदा दो फिल्टर चैम्बर बनेंगे। अक्सर गांव में पानी या तो सड़कों पर जाता है, ऐसे ही गड्ढों में जमा करते रहते हैं।

66 पंचायतों से शुरूआत, चूने से बना रहे नक्शा

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में किस तरह गीला, सूखा कचरा एकत्र करना है। ओडीएफ प्लस के तहत 66 पंचायतों से शुरूआत की गई है। इसमें स्वच्छ भारत मिशन की टीम गांव-गांव जाकर चूना डालकर लोगों को बता रही है कि कैसे कचरे को अलग करना है। खाद के लिए उसे कैसे स्टोर करना है। इसके लिए स्व सहायता समूहों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

वर्जन
ओडीएफ प्लस के तहत गांवों में स्वच्छता के लिए काफी काम होने हैं। इसकी शुरूआत पंचायतों में हो गई है। स्वच्छ भारत मिशन की टीमें काम कर रही हैं। गीले सूखे कचरे को सैगरीगेट करने का काम भी स्व सहायता समूह करेंगे।

विकास मिश्रा, सीईओ, जिला पंचायत, भोपाल