2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कोरियोग्राफर बनने मुंबई आया था, प्लेटफॉर्म नहीं मिला तो एक्टर बन गया

सोनी सब टीवी के नए शो बावले उतावले के प्रमोशन के लिए शहर में आए पारस अरोड़ा और शिवानी बडोनी

2 min read
Google source verification
bhopal

सोनी सब टीवी के नए शो बावले उतावले के प्रमोशन के लिए शहर में आए पारस और अरोड़ा शिवानी बडोनी

भोपाल। मुझे बचपन से डांस का शौक था। 2007 में कई सपने लेकर मुंबई आया, उस वक्त डांसर के लिए इंडस्ट्री में ज्यादा मौके नहीं थे। कई बार प्रयास के बाद भी मौका नहीं मिला तो फ्रेंड्स ने एक्टिंग में हाथ अजमाने की सलाह दी। एक्टिंग ऑडिशन में सिलेक्ट हुआ तो फिर खुद को इसी में रमा लिया। अब डांसर बनने की सोच भी नहीं सकता, क्योंकि अब इतना टफ कॉम्पीटिशन है कि मैं नए डांसर्स से फाइट नहीं कर पाऊंगा। यह कहना है एक्टर पारस अरोड़ा का। वे एक्ट्रेस शिवानी बडोनी के साथ सोनी सब टीवी के नए शो बावले उतावले के प्रमोशन के सिलसिले में राजधानी में आए थे।

पारस ने कंगना की फिल्म रज्जो में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत की। इसके बाद रामायण, वीर शिवाजी, उड़ान और दिल ही तो है जैसे सीरियल में काम किया। पारस का कहना है कि वीर शिवाजी ने उन्हें इंडस्ट्री में नहीं पहचान दिलाई, लेकिन लगातार हिस्टोरिकल रोल प्ले करने के कारण खुद को असहज महसूस करने लगा था। इस छवि से बाहर निकलने के लिए मैंने करीब आठ माह तक कोई रोल नहीं किया। मुझे जब इस रोल के लिए कॉल आया तो मैंने तुरंत हां कर दी, क्यूंकि कॉमेडी करना एक टफ टास्क है।

वर्कशॉप में सीखी मप्र की लोकल लैंग्वेज
पारस बताते हैं कि शो शहर के दो उतावले नौजवानों की कहानी है। जहां युवाओं का केवल एक ही लक्ष्य है कि अपना प्यार ढंूढो और शादी कर लो। इस शो की पृष्ठभूमि मध्यप्रदेश पर बेस्ड है। दोनों ने अपने डायलॉग्स में लोकल टच देने के लिए एक माह की वर्कशॉप अटैंड की। पारस का कहना है कि मैं खुद बरेली का रहने वाला हूं। इंडस्ट्री में इतना टफ कॉम्पीटिशन है कि आपकों यहां बने रहने के लिए खुद को हर पल साबित करना पड़ता है। मैंने कभी एक्टिंग का कोर्स नहीं किया। खुद को स्ट्रग्ल से ही सीखता गया।

डायरेक्टर से रोज खाना पड़ती है डांट
देहरादून की रहने वाली शिवानी का यह पहला शो है। वे इस शो के साथ इंजीनियरिंग फोर्थ ईयर की स्टडी भी कर रही है। बचपन से ही एक्ट्रेस बनने का सपना था, लेकिन पापा इसके लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि पहले पढ़ाई करो फिर करियर बनाना। डेढ़ साल पहले उन्होंने हां कि तो मैंने मुंबई पहुंची। तीस ऑडिशन के बाद मुझे इस रोल के लिए कॉल आया। एक्टिंग का पहला एक्सपीरियंस होने के कारण डायरेक्टर की रोज डांट खाना पड़ती है। मैं उनके किसी बात को समझाने से पहले ही ओके बोल देती हूं। वे बाद मैं मुझे बताते हैं कि वो क्या समझाना चाह रहे थे।