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कब्जे में जमीनें,रहवासी सुविधाओं को तरसे

नगर निगम प्रशासन की सुस्ती का नतीजा राजधानी में 750 एकड़ जमीन अतिक्रमण का शिकार

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भोपाल. राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों में रहवासी उद्यान, अस्पताल, खेल मैदान, कम्युनिटी हॉल, ओपन जिम जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नगर निगम प्रशासन हमेशा जमीन नहीं होने का रोना रोता है, जबकि हकीकत में उसकी करीब 750 एकड़ जमीन अतिक्रमण की शिकार है। निगम सरकारी जमीनों से कब्जे हटवाए तो लोगों को अपने घर के पास सुविधाएं मिलें। निगम प्रशासन के लचर रवैया के चलते मंगलवार को हाईकोर्ट ने कोहेफिजा क्षेत्र में सरकारी जमीन से कब्जे हटाने के लिए आदेश दिए थे।

जनता आवेदन देकर थकी, अफसरों की लापरवाही नहीं थमी
कोलार
रहवासियों की जरूरत: पार्क , खेल मैदान, ओपन जिम, कम्युनिटी हॉल।
मौके पर: हॉकर्स कॉर्नर के लिए यहां सरकारी जमीननहीं मिली। हकीकत में कोलार पहाड़ी,गेहूंखेड़ा और तीन मास्टर प्लान रोड पर 150 एकड़ जमीन अलग-अलग क्षेत्रों में अतिक्रमण की चपेट में है।

नगर निगम को कोलार के व्यवस्थित विकास और यहां मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने आवेदन दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
आशा देवलिया, रहवासी

होशंगाबाद रोड
रहवासियों की जरूरत: मिसरोद, कटारा, साकेत नगर समेत अन्य क्षेत्रों में पांच से अधिक उद्यान हों।
मौके पर: 70 नई कॉलोनियां, लेकिन निगम का एक भी पार्क नहीं है। यहां तीन मास्टर प्लान रोड अतिक्रमण की चपेट में हंै। बाग मुगालिया में 80 एकड़ क्षेत्र में कब्जा है। कुल 250 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण की चपेट में है।

जनसुविधाओं को विकसित करने निगम से लेकर भोपाल की चौपाल में आवेदन दिए। 60त्न कॉलोनियों में पार्क तक नहीं हंै।
सुनील उपाध्याय, रहवासी

अशोका गार्डन
रहवासियों की जरूरत: पार्क , खेल मैदान, ओपन जिम जैसी सुविधाओं की दरकार है।
मौके पर: क्षेत्र में पांच जगह सरकारी 70 एकड़ जमीन है, लेकिन पूरी कब्जे में। बहुमंजिला इमारतों से लेकर झुग्गियां तक आबाद हैं। अर्जुनङ्क्षसह दशहरा मैदान भी अतिक्रमण से अछूता नहीं है।

सुविधाओं के लिए हम आवेदन दे रहे हैं तो शहंशाह गार्डन में खाली जमीन पर कोई निर्माण करवा रहा है। प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
कुक्कू बेदी, रहवासी

-नगर निगम के कम्युनिटी हॉल और स्वास्थ्य केंद्र पर कब्जे हुए।
-पुराने कुएं और बावडिय़ां अतिक्रमण से खत्म होने की कगार पर जा पहुंचे हैं।
-नवाब सिद्दीक हसन तालाब समेत अन्य भी खत्म हो रहे हैं।
-अरेरा समेत तमाम आवासीय कॉलोनियों में उपयोग बदलकर नियमविरुद्ध तरीके से व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही हंै।

हाईकोर्ट ने अतिक्रमण पर मांगा है जवाब
जबलपुर. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि भोपाल के कस्तूरबा नगर की शासकीय जमीन पर हुए अतिक्रमण हटाने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए जा रह हैं? जस्टिस आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की खण्डपीठ ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को इस संबंध में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई की अगली तारीख 13 मई तय की गई है।
यह है मामला
भोपाल के कस्तूरबा नगर निवासी सुभाष चंद्र जैन ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण कर रखा है। शिकायत कई बार नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय के आला अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। आग्रह किया गया कि सरकार को इन अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने अनावेदक बनाए गए राज्य सरकार के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।