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यहां खिलता है दुर्लभ कमल, इसी तालाब से निकले थे विष्णु के वराह अवतार

मझौली का नरीला तालाब है विख्यात, लक्ष्मी पूजन में इस कमल का है विशेष महत्व, इसी तालाब से निकली थी भगवान विष्णु वाराह की प्रतिमा।

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Abha Sen

Oct 31, 2015

जबलपुर। वेद-पुराणों में सहस्त्र दल वाले का कमल का उल्लेख है, लेकिन इस कमल को कम लोगों ने ही देखा होगा। जबलपुर के समीप स्थित मझौली कस्बे के लोग तो हर भोर इन कमलों को खिलते और शाम को अपने आप बंद होते हुए देखते हैं। एक हजार पंखुडिय़ों वाला सफेद रंग का यह कमल पुष्प दुर्लभ है।
sahsradal kamal

माना जाता है कि पूजन में इसको अर्पित करने पर माता महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। ये कमल मझौली के उसी नरीला तालाब में खिलते हैं, जिस तालाब से भगवान विष्णु के वाराह अवतार की अनगढ़ प्रतिमा प्रकट हुई थी।

श्वेत कमल है खास
इस तालाब का संबंध नगर के मध्य स्थित श्रीविष्णु वराह अवतार के मंदिर से है जिसकी वजह से लोगों की धार्मिक आस्थाएं इससे जुड़ी हैं। इस तालाब का महत्व जहां वराह अवतार की मूर्ति इससे प्राप्त होने के कारण है तो वहीं इसमें सहस्रदल कमल खिलने के कारण भी यह खास माना जाता है। आज से करीब एक दशक पहले तक करीब दस एकड़ के इस तालाब में बड़ी संख्या में एक हजार श्वेत दल वाले कमल खिलते थे जिससे पूरा तालाब श्वेत पुष्पों की चादर ओढ़े नजर आता था पर अब इनकी संख्या काफी कम हो गई है।

शासन के अधीन इस तालाब में पूर्व में सहस्रदल कमल की विशेष प्रजाति को बचाए रखने के लिए यहां मत्स्य पालन प्रतिबंधित रहा है।
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दीवाली पर खास पूजन
श्री विष्णु वाराह मंदिर के पुजारी श्रीकांत तिवारी का कहना है कि माता लक्ष्मी के पूजन में सहस्त्रदल कमल के फूल का विशेष महत्व है। कमल दल उनका आसन है। जिसकी वजह से दीपावली पर कमल पुष्प की विशेष मांग होती है। नरीला तालाब में श्वेत रंग के सहस्रदल वाले कमल खिलते हैं जो देश में और कहीं नहीं पाए जाते । इनकी संख्या अब काफी कम हो गई है। नरीला तालाब में इनके अस्तित्व को बचाए रखने के लिए तालाब के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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अध्ययन एवं शोध
मझौली निवासी वयोवृद्ध श्रीकांत अग्रवाल व एनके शुक्ला का कहना है कि सहस्रकमल दल के लिए देश भर में विख्यात है। सहस्त्रदल कमल विशेष तौर पर दीपावली पर पूजा में उपयोग के लिए पूरे देश में भेजे जाते हैं। वनस्पतिशास्त्री भी बाहर से इस सहस्रकमल के अध्ययन एवं शोध के लिए आते रहे हैं। कुछ समय से सहस्रदल कमल की पैदावार काफी कम हो गई है और इनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

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