
Sadhuram school katni
कटनी. शहर स्थित साधुराम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आज सिस्टम की लापरवाही का जिंदा सबूत बन चुका है, जहां बच्चों के सपने संवरने चाहिए थे, वहां अतिक्रमण, गंदगी और बाहरी दखल ने शिक्षा का दम घोंट दिया है, स्कूल परिसर में प्रसाधन, अवैध कब्जे और जर्जर भवन के बीच पढऩे को मजबूर बच्चे सीधे तौर पर नगर निगम, प्रशासन की असफलता को उजागर कर रहे हैं, फिर भी जिम्मेदार खामोश बैठे हैं…।
शहर के हृदय स्थल सुभाष चौक के समीप स्थित साधुराम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आज बदहाली, अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही की मार झेल रहा है। जिस परिसर में बच्चों को बेहतर शिक्षा और खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, वहां अब अव्यवस्था का साम्राज्य फैल चुका है। नगर निगम और शिक्षा विभाग व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते स्कूल धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि स्कूल परिसर को बाहरी गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। पहले यहां आधार सेंटर संचालित किया गया, जिससे दिनभर कई साल सैकड़ों बाहरी लोगों की आवाजाही रहती थी। भले ही अब उसका प्रवेश द्वार दूसरी ओर कर दिया गया हो, लेकिन कक्ष अब भी स्कूल का ही उपयोग में लिया जा रहा है। इससे न केवल शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
स्थिति यहीं नहीं रुकती…, नगर निगम प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर कुछ वर्ष पहले स्कूल परिसर में सार्वजनिक प्रसाधन तक बना दिया। परिणामस्वरूप, दिनभर बाहरी लोग यहां आकर पेशाब करते हैं, गंदगी फैलाते हैं, परिसर में ताकझांक करते हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों को असहज माहौल में पढ़ाई-लिखाई करनी पड़ रही है, बच्चियों की सुरक्षा में भी खतरा है। शिक्षा के मंदिर में इस तरह की अव्यवस्था प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
स्कूल परिसर और खेल मैदान में अतिक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है। धर्म के नाम पर किए गए अतिक्रमण ने बच्चों के खेलने और अन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध स्थान को सीमित कर दिया है। खेल मैदान सिमटने से बच्चों का शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, वर्षों पुरानी स्कूल बिल्डिंग अब जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होती जा रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
एक समय था जब साधुराम स्कूल शहर का प्रमुख शिक्षण संस्थान माना जाता था। यहां 600 से अधिक छात्र अध्ययनरत थे, नामी लोग यहां से पढकऱ निकले हैं, जिन्होंने देशभर में नाम कमाया है, लेकिन वर्तमान में स्थिति बेहद चिंताजनक है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक केवल 120 छात्र पंजीकृत हैं। वहीं इसी परिसर में कक्षा 1 से 8 तक करीब 100 बच्चे और उर्दू स्कूल के 45 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। कुल मिलाकर ढाई सौ से अधिक बच्चों की पढ़ाई इसी परिसर में चल रही है, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस ऐतिहासिक स्कूल को रीडेंसीफिकेशन योजना में शामिल कर लिया गया है। प्रस्ताव है कि यहां नीलामी कराकर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो शहर की शैक्षणिक धरोहर पूरी तरह खत्म हो जाएगी। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द स्कूल की स्थिति सुधारने, अतिक्रमण हटाने और बच्चों के लिए सुरक्षित व बेहतर माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, वरना आने वाली पीढिय़ों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
स्कूल परिसर में आधार सेंटर का मामला संज्ञान में आया था, उसे तत्काल बंद कराकर उसका गेट जोन कार्यालय से कराया गया है। स्कूल में नया प्रसाधन बनवाया गया है। रंगरोगन व मरम्मत भी कराई जा रही है। यह स्कूल भवन रिडेंसीफिकेशन योजना में शामिल है। स्कूल में सार्वजनिक प्रसाधन को तत्काल बंद कराएंगे। अतिक्रमण को भी हटवाया जाएगा।
Updated on:
06 Apr 2026 09:41 am
Published on:
06 Apr 2026 09:26 am
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